भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 50 करोड़ रुपये तक की टर्नओवर वाली कंपनियों के लिए बैंकों की अधिकतम सकल खुदरा जोखिम सीमा को बढ़ाकर 7.5 करोड़ रुपये कर दिया है। इससे पहले यह सीमा 5 करोड़ रुपये थी। यह निर्णय छोटे व्यवसायों में ऋण प्रवाह बढ़ाने के लिए लिया गया है। सभी नए एक्सपोज़र और मौजूदा एक्सपोज़र पर 75 प्रतिशत का जोखिम भार लागू होगा जहाँ बैंकों द्वारा 7.5 करोड़ रुपये की संशोधित सीमा तक वृद्धिशील जोखिम लिया जा सकता है।
इसके अलावा आरबीआई ने 1 सितंबर, 2020 से 31 मार्च, 2021 के बीच अधिग्रहीत एसएलआर प्रतिभूतियों के लिए परिपक्वता (Held to Maturity) की मौजूदा 22 प्रतिशत की सीमा को 31 मार्च, 2022 तक बढ़ाकर करने का भी निर्णय लिया है। इसका मतलब है कि बैंक 31 मार्च, 2022 तक एचटीएम श्रेणी में ऐसी अतिरिक्त एसएलआर प्रतिभूतियों को रखना आगे भी जारी रख सकते हैं। 30 जून, 2022 को समाप्त हुए तिमाही से आरम्भ की गई एचटीएम सीमा को चरणबद्ध तरीके से 19.5 प्रतिशत तक सीमित किया जाएगा।
उपरोक्त समाचारों से आने-वाली परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य-
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