भारतीय रिजर्व बैंक वर्तमान में अपनी डिजिटल मुद्रा (digital currency), सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (Central Bank Digital Currency – CBDC) के लिए चरणबद्ध कार्यान्वयन रणनीति पर काम कर रहा है, और इसे जल्द ही थोक (wholesale) और खुदरा (retail) क्षेत्रों में लॉन्च करेगा। भारत पहले से ही डिजिटल भुगतान में अग्रणी है, लेकिन छोटे मूल्य के लेनदेन के लिए नकद प्रमुख है। आरबीआई (RBI) वर्तमान में सीबीडीसी के दायरे, अंतर्निहित प्रौद्योगिकी (underlying technology), सत्यापन तंत्र (validation mechanism), वितरण वास्तुकला (distribution architecture) और ऐननिमिटी की डिग्री (degree of anonymity) आदि की जांच कर रहा है।
आरबीआई के लिए प्राथमिक विचार कुछ या कई आभासी मुद्राओं में देखी गई अस्थिरता के भयावह स्तर से उपभोक्ताओं की रक्षा करना है, जिनका कोई संप्रभु समर्थन नहीं है। हालांकि डिजिटल करेंसी का चरणबद्ध तरीके से रोलआउट (rollout) भारत के लिए शुभ संकेत है, लेकिन यह अपनी चुनौतियों के साथ आएगा।
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डिजिटल मुद्राएं दिन-ब-दिन अधिक से अधिक कर्षण प्राप्त कर रही हैं, और ऐसे देश हैं जिन्होंने इक्वाडोर (Ecuador), ट्यूनीशिया (Tunisia), सेनेगल (Senegal), स्वीडन (Sweden), एस्टोनिया (Estonia), चीन (China), रूस (Russia), जापान (Japan), वेनेजुएला (Venezuela) और इज़राइल (Israel) सहित डिजिटल मुद्राओं को लॉन्च किया है या लॉन्च करने जा रहे हैं।
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