RBI ने पेमेंट्स रेगुलेटरी बोर्ड की पहली मीटिंग की

भारत के डिजिटल भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण नियामकीय कदम के तहत नवगठित निगरानी निकाय की पहली बैठक आयोजित की गई है। देश में डिजिटल लेन-देन के तेज़ी से विस्तार के साथ, मज़बूत और स्वतंत्र विनियमन की आवश्यकता बढ़ गई है। इसी दिशा में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वैश्विक मानकों के अनुरूप भुगतान और निपटान प्रणालियों को मार्गदर्शन, निगरानी और सुदृढ़ करने के लिए एक समर्पित बोर्ड को सक्रिय किया है।

क्यों चर्चा में है?

भारतीय रिज़र्व बैंक ने मुंबई में पेमेंट्स रेगुलेटरी बोर्ड (PRB) की पहली बैठक आयोजित की। इस बैठक की अध्यक्षता RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने की।

पेमेंट्स रेगुलेटरी बोर्ड (PRB) क्या है?

पेमेंट्स रेगुलेटरी बोर्ड (PRB) एक वैधानिक निकाय है, जिसका गठन भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 में संशोधन के बाद किया गया। यह संशोधन 9 मई 2025 से प्रभावी हुआ। PRB का उद्देश्य भारत में भुगतान प्रणालियों के लिए विशेषीकृत विनियमन और निगरानी प्रदान करना है, ताकि डिजिटल भुगतान में सुरक्षा, दक्षता और नवाचार को बढ़ावा दिया जा सके, साथ ही वित्तीय स्थिरता भी सुनिश्चित हो।

पहली बैठक में प्रमुख चर्चाएँ

  • PRB की पहली बैठक में RBI के भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग (Department of Payment and Settlement Systems) के कार्यकलापों की समीक्षा की गई।
  • बोर्ड ने घरेलू और वैश्विक भुगतान प्रणालियों से जुड़े वर्तमान फोकस क्षेत्रों पर विचार किया, जो अंतरराष्ट्रीय डिजिटल भुगतानों में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाता है।
  • इसके अलावा, सुरक्षित, समावेशी और सुदृढ़ भुगतान अवसंरचना सुनिश्चित करने के लिए नियामकीय प्राथमिकताओं पर चर्चा हुई।

Payments Vision 2028 और डिजिटल भुगतान सर्वेक्षण

  • RBI ने Payments Vision 2028 का मसौदा प्रस्तुत किया, जिसमें भारत के भुगतान पारिस्थितिकी तंत्र के भविष्य के विकास के लिए रोडमैप निर्धारित किया गया है।
  • PRB ने नवाचार, उपभोक्ता संरक्षण और वैश्विक इंटरऑपरेबिलिटी को समर्थन देने हेतु रणनीतिक मार्गदर्शन प्रदान किया।
  • साथ ही, RBI के डिजिटल भुगतान सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष साझा किए गए, जिनसे डिजिटल लेन-देन में उपयोगकर्ता अपनाने की प्रवृत्तियों, चुनौतियों और उभरते रुझानों की जानकारी मिली।

प्रतिभागी और संस्थागत प्रतिनिधित्व

इस बैठक में इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव, वित्तीय सेवा विभाग के सचिव और RBI के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
उनकी भागीदारी भारत की डिजिटल वित्तीय संरचना को आकार देने में केंद्र सरकार और केंद्रीय बैंक के बीच बेहतर समन्वय को दर्शाती है।

भुगतान प्रणाली विनियमन का महत्व

  • भारत UPI जैसे प्लेटफॉर्मों के नेतृत्व में दुनिया के सबसे तेज़ी से बढ़ते डिजिटल भुगतान बाज़ारों में से एक है।
  • मज़बूत विनियमन साइबर जोखिमों, प्रणालीगत विफलताओं और उपभोक्ता संरक्षण से जुड़े मुद्दों से निपटने के लिए अत्यंत आवश्यक है।
  • PRB की स्थापना भुगतान प्रणालियों के लिए विशेषीकृत और पारदर्शी शासन सुनिश्चित करती है, जिससे भरोसा बढ़ेगा और डिजिटल भुगतान का दीर्घकालिक विकास संभव होगा।

पेमेंट्स रेगुलेटरी बोर्ड (PRB) – मुख्य बातें

विषय विवरण
कानूनी आधार भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 से अधिकार प्राप्त
पृष्ठभूमि भुगतान और निपटान प्रणाली के विनियमन एवं पर्यवेक्षण बोर्ड (BPSS) का स्थान लिया
BPSS, RBI के केंद्रीय बोर्ड की एक समिति थी
PRB की संरचना पदेन अध्यक्ष (Ex-officio Chairperson): RBI गवर्नर
पदेन सदस्य: RBI के एक डिप्टी गवर्नर एवं भुगतान व निपटान प्रणाली के प्रभारी कार्यकारी निदेशक
सरकारी नामित सदस्य: केंद्र सरकार द्वारा नामित 3 सदस्य
स्थायी आमंत्रित सदस्य: RBI के प्रधान विधिक सलाहकार
सहायक संरचना RBI का भुगतान और निपटान प्रणाली विभाग (DPSS)
DPSS सीधे PRB को रिपोर्ट करता है
निर्णय लेने की प्रक्रिया उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के बहुमत से निर्णय
मत बराबर होने पर अध्यक्ष को निर्णायक (Casting) मत
अध्यक्ष की अनुपस्थिति में डिप्टी गवर्नर को निर्णायक मत का अधिकार
बैठक की आवश्यकता वर्ष में कम से कम दो बार बैठक अनिवार्य
PRB के कार्य सभी भुगतान प्रणालियों का विनियमन एवं पर्यवेक्षण
इलेक्ट्रॉनिक एवं गैर-इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणालियाँ
घरेलू तथा सीमा-पार (Cross-border) भुगतान प्रणालियाँ
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vikash

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