भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने वैश्विक प्राइवेट इक्विटी फर्म वॉरबर्ग पिंकस को IDFC फर्स्ट बैंक में 9.99% तक की हिस्सेदारी हासिल करने की मंज़ूरी दे दी है। यह ₹4,876 करोड़ का निवेश बैंक की पूंजी आधार को मजबूत करेगा और इसके विकास लक्ष्यों को समर्थन देगा।
पृष्ठभूमि
इस निवेश प्रस्ताव की घोषणा पहली बार अप्रैल 2025 में की गई थी, और इसके बाद 3 जून 2025 को इसे भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) से भी मंज़ूरी मिल गई थी। यह निवेश वारबर्ग पिंकस की सहयोगी कंपनी करंट सी इन्वेस्टमेंट्स बी.वी. के माध्यम से किया जा रहा है।
प्रमुख निवेश विशेषताएँ
वॉरबर्ग पिंकस लगभग 81.27 करोड़ कंपल्सरिली कन्वर्टिबल प्रेफरेंस शेयर्स (CCPS) ₹60 प्रति शेयर की दर से खरीदेगा। इन शेयरों को कन्वर्ट करने पर कंपनी को IDFC फर्स्ट बैंक में अधिकतम 9.99% इक्विटी हिस्सेदारी प्राप्त होगी, जो RBI द्वारा अतिरिक्त विनियामक अनुमति के बिना अनुमत अधिकतम सीमा है।
इस कदम का महत्व
यह निवेश IDFC फर्स्ट बैंक में एक प्रतिष्ठित वैश्विक निवेशक का विश्वास दर्शाता है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत का निजी बैंकिंग क्षेत्र निवेश के लिहाज़ से कितना आकर्षक है और बैंक के पास भविष्य में बढ़ने की पर्याप्त क्षमता है।
IDFC फर्स्ट बैंक पर प्रभाव
नई पूंजी के आगमन से बैंक की बैलेंस शीट मजबूत होगी, ऋण देने की क्षमता बढ़ेगी और रणनीतिक विस्तार योजनाओं को बल मिलेगा। इसके साथ ही बैंक खुद को खुदरा (रेटेल) और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (SME) ऋण क्षेत्र में मज़बूती से प्रतिस्पर्धा करने की स्थिति में ला पाएगा।
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