RBI ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के सारस्वत बैंक में विलय को मंजूरी दी

भारत के सहकारी बैंकिंग क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक और देश के सबसे बड़े शहरी सहकारी बैंक, सारस्वत को-ऑपरेटिव बैंक के विलय को मंज़ूरी दे दी है। यह विलय आधिकारिक तौर पर 4 अगस्त, 2025 से प्रभावी होगा।

विलय की मुख्य जानकारी
स्वीकृत समामेलन योजना (Scheme of Amalgamation) के अंतर्गत:

  • सरस्वत बैंक न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक की संपत्तियों और देनदारियों को पूरी तरह से अपने अधीन ले लेगा।

  • न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक की सभी शाखाएँ अब सरस्वत बैंक की शाखाओं के रूप में कार्य करेंगी।

  • न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के ग्राहक और जमाकर्ता, अब सरस्वत बैंक के ग्राहक माने जाएंगे, और उनके हितों की पूरी तरह से सुरक्षा की जाएगी।

  • इस कदम से ग्राहकों को बेहतर स्थिरता, सुविधाजनक सेवाएँ, और मज़बूत वित्तीय आधार प्राप्त होगा।

अनुमोदन प्रक्रिया
विलय की प्रक्रिया को दोनों बैंकों के शेयरधारकों की मंज़ूरी प्राप्त हुई:

  • सरस्वत बैंक की विशेष आम बैठक (SGM), 22 जुलाई 2025 को आयोजित हुई, जिसमें समामेलन को समर्थन मिला।

  • न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक की वार्षिक आम बैठक (AGM) में भी इसे स्वीकृति दी गई। इसके बाद प्रस्ताव भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) को अंतिम मंज़ूरी के लिए भेजा गया।

  • RBI की मंज़ूरी मिलने के साथ ही, यह बदलाव निर्धारित तिथि से सुचारू रूप से लागू होगा।

ग्राहकों पर प्रभाव
न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक के जमाकर्ताओं और खाताधारकों के लिए यह विलय सुनिश्चित करता है:

  • खातों का सरस्वत बैंक में बिना किसी रुकावट के स्थानांतरण

  • जमाओं की सुरक्षा पहले की तरह बनी रहेगी, अब यह सरस्वत बैंक के मज़बूत वित्तीय आधार पर आधारित होगी।

  • देशभर में फैले विस्तृत शाखा नेटवर्क और सेवाओं का लाभ मिलेगा।

यह कदम ग्राहकों का विश्वास बढ़ाने के साथ-साथ सहकारी बैंकिंग क्षेत्र को मज़बूती प्रदान करने की दिशा में भी अहम माना जा रहा है।

इस कदम का महत्व
यह विलय RBI के सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसमें शामिल हैं:

  • सहकारी बैंकों को मज़बूत करना और उन्हें समेकित करना।

  • जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना, विशेषकर छोटे सहकारी बैंकों द्वारा सामना की जा रही चुनौतियों के बीच।

  • ऐसे मज़बूत और प्रतिस्पर्धी संस्थानों का निर्माण करना, जो शहरी और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दे सकें।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

ब्रिटेन सरकार का बड़ा फैसला: अब कभी सिगरेट नहीं खरीद पाएंगे बच्चे, संसद ने पास किया कानून

ब्रिटेन (UK) की संसद ने 'तंबाकू और वेप्स बिल' को मंज़ूरी दे दी है। इस…

7 hours ago

Top Current Affairs News 23 April 2026: पढ़ें फटाफट अंदाज में

Top Current Affairs 23 April 2026 in Hindi: बता दें, आज के इस दौर में सरकारी…

7 hours ago

कोणार्क सूर्य मंदिर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की जीर्णोद्धार परियोजना की व्याख्या

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने कोणार्क सूर्य मंदिर में एक महत्वपूर्ण संरक्षण अभियान शुरू किया…

7 hours ago

भारत ने ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में “वीएम फ्रेम्स” प्रतियोगिता शुरू की

भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने 'वंदे मातरम' के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर…

10 hours ago

आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नादेंडला भास्कर राव का हैदराबाद में निधन

अविभाजित आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नादेंडला भास्कर राव का हैदराबाद में 90 वर्ष की…

11 hours ago

सरकार का ऑनलाइन गेमिंग पर बड़ा फैसला, 1 मई से लागू होंगे नए नियम

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय ने 22 अप्रैल 2026 को बहुप्रतीक्षित ऑनलाइन गेमिंग नियमों को अधिसूचित…

12 hours ago