भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए स्मॉल फाइनेंस बैंकों (SFBs) को यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के माध्यम से पूर्व-स्वीकृत (Pre-Sanctioned) क्रेडिट लाइन देने की अनुमति दे दी है। यह निर्णय उन लोगों और छोटे व्यवसायों के लिए वित्तीय समावेशन (Financial Inclusion) को बढ़ावा देगा, जिनकी औपचारिक बैंकिंग तक सीमित पहुँच है।
यूपीआई प्लेटफॉर्म, जिसे 2016 में लॉन्च किया गया था, शुरू में रीयल-टाइम फंड ट्रांसफर के लिए विकसित किया गया था। समय के साथ, इसका दायरा बढ़ा और यह व्यापारियों, उपभोक्ताओं और व्यवसायों के लिए एक प्रमुख भुगतान प्रणाली बन गया।
SFBs ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में छोटे व्यवसायों, निम्न-आय वर्ग के ग्राहकों और नए उधारकर्ताओं को सेवाएँ प्रदान करते हैं। उनके लिए पारंपरिक बैंकिंग सेवाओं तक पहुँचना कठिन होता है।
आरबीआई के इस फैसले से कई लाभ होंगे:
भारत को कैशलेस अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ाने में UPI के माध्यम से त्वरित क्रेडिट उपलब्धता एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और देश के आर्थिक विकास को नई गति प्रदान करेगी।
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