विधायी प्रक्रियाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने 9 जून 2025 को पुडुचेरी विधानसभा के लिए राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन (NeVA) का उद्घाटन किया। इस पहल के साथ पुडुचेरी भारत का 19वां ऐसा विधानमंडल बन गया है जिसने NeVA प्लेटफॉर्म को अपनाया है। यह कदम ‘डिजिटल इंडिया’ मिशन के अनुरूप पारदर्शी, पेपरलेस और कुशल शासन को सुनिश्चित करने की दिशा में उठाया गया है।
पुडुचेरी ने अपने विधायी कामकाज को डिजिटाइज़ करने के लिए आधिकारिक रूप से NeVA डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया। यह पहल केंद्र सरकार के ‘एक राष्ट्र, एक एप्लिकेशन’ दृष्टिकोण के अंतर्गत आती है। इसका उद्देश्य शासन को आधुनिक और डिजिटल बनाना, कागज़ के उपयोग को कम करना और लाइवस्ट्रीमिंग के माध्यम से सार्वजनिक पारदर्शिता बढ़ाना है।
NeVA (राष्ट्रीय ई-विधान एप्लिकेशन) एक मिशन मोड प्रोजेक्ट है जो डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत आता है। इसका उद्देश्य देश के सभी राज्य और केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं को एक एकीकृत डिजिटल मंच पर लाना है।
लक्ष्य:
कागज़ रहित, कुशल, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित विधायी वातावरण तैयार करना।
कागज़ के उपयोग को समाप्त करना — प्रतिवर्ष 3–5 टन कागज़ की बचत।
विधायी कार्यवाही तक रीयल-टाइम पहुंच सुनिश्चित करना।
जनता की ज़वाबदेही बढ़ाने हेतु कार्यवाही का लाइव प्रसारण।
“Go Green” शासन के तहत पर्यावरणीय स्थिरता को समर्थन देना।
सभी विधानसभाओं में केंद्रीकृत डेटा और दस्तावेज़ प्रबंधन की सुविधा।
उद्घाटन डॉ. एल. मुरुगन द्वारा निम्न प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति में किया गया:
उपराज्यपाल के. कैलाशनाथन
मुख्यमंत्री एन. रंगासामी
विधानसभा अध्यक्ष आर. सेल्वम
पुडुचेरी भारत का 19वां विधानमंडल बन गया है जिसने NeVA को अपनाया है।
यह परियोजना संपूर्ण रूप से केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्रालय द्वारा वित्त पोषित है।
डॉ. एल. मुरुगन ने NeVA को भारत में व्यापक सुधारों का हिस्सा बताया, जैसे:
एक राष्ट्र, एक राशन कार्ड
एक राष्ट्र, एक चुनाव (प्रस्तावित)
भारत की डिजिटल उपलब्धियों को रेखांकित किया:
डिजिटल लेनदेन में विश्व में दूसरा स्थान
आत्मनिर्भर भारत के तहत रक्षा आयात में कमी
प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से कल्याणकारी योजनाओं में सुधार
विधायकों और कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण
जागरूकता अभियान और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए जाएंगे।
इससे नागरिकों की भागीदारी, पर्यावरण-अनुकूल शासन और विधायी कार्यों में दक्षता को बढ़ावा मिलेगा।
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