प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) ने 1 जनवरी 2026 को अपने कार्यान्वयन के 9 वर्ष पूरे कर लिए। यह भारत में मातृ स्वास्थ्य, पोषण और महिलाओं के कल्याण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। वर्ष 2017 में शुरू की गई यह भारत सरकार की प्रमुख मातृत्व लाभ योजना है, जिसने विशेष रूप से समाज के कमजोर वर्गों की गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं को निरंतर सहायता प्रदान की है।
सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों और सामान्य पाठकों के लिए PMMVY सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं, महिला एवं बाल विकास तथा स्वास्थ्य से जुड़े करंट अफेयर्स का एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना एक केंद्रीय प्रायोजित योजना (CSS) है, जिसे महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (MoWCD) द्वारा लागू किया जाता है। इसे 1 जनवरी 2017 को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA), 2013 की धारा 4 के तहत लागू किया गया था, जो पात्र महिलाओं को मातृत्व लाभ प्रदान करने का प्रावधान करती है।
इस योजना का उद्देश्य आंशिक वेतन क्षतिपूर्ति प्रदान करना तथा सुरक्षित गर्भावस्था और प्रसव को बढ़ावा देना है, ताकि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य परिणामों में सुधार हो सके।
PMMVY का मुख्य उद्देश्य गर्भावस्था और प्रसव के बाद महिलाओं को वित्तीय सहायता देकर उनके मातृत्व स्वास्थ्य को सुदृढ़ करना है। यह सहायता महिलाओं को वेतन हानि से उबरने में मदद करती है, संस्थागत प्रसव को प्रोत्साहित करती है और माताओं व शिशुओं में कुपोषण के जोखिम को कम करती है।
इसके साथ ही, योजना के तहत गर्भावस्था के दौरान और प्रसव के बाद छह माह तक आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से निःशुल्क पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की भी परिकल्पना की गई है।
वर्ष 2022 में भारत सरकार ने मिशन शक्ति की शुरुआत की, जो महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण से जुड़ी विभिन्न योजनाओं को एकीकृत करता है। PMMVY को मिशन शक्ति के ‘समर्थ्य’ घटक के अंतर्गत शामिल किया गया, जिसका उद्देश्य महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण और वित्तीय समावेशन है। इस एकीकरण से योजना के बेहतर समन्वय, निगरानी और लक्षित लाभ वितरण में सुधार हुआ है।
PMMVY के तहत लाभ पहले दो जीवित बच्चों के लिए उपलब्ध है, बशर्ते कि दूसरा बच्चा बालिका हो। यह प्रावधान लैंगिक समानता और बालिका के महत्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया है।
हालांकि, केंद्र/राज्य सरकार या सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में नियमित रूप से कार्यरत गर्भवती महिलाएं, या वे महिलाएं जो किसी अन्य कानून के तहत समान मातृत्व लाभ प्राप्त कर रही हैं, इस योजना के अंतर्गत पात्र नहीं हैं।
PMMVY के तहत पात्र लाभार्थियों को प्रत्यक्ष नकद सहायता प्रदान की जाती है।
पहले बच्चे के लिए कुल ₹5,000 की राशि दो किश्तों में दी जाती है।
दूसरे बच्चे (बालिका) के लिए ₹6,000 की राशि एक किश्त में प्रदान की जाती है।
पहली किश्त ₹3,000 गर्भावस्था के पंजीकरण और अंतिम मासिक धर्म की तिथि से छह माह के भीतर कम से कम एक प्रसवपूर्व जांच (ANC) पूरी होने पर दी जाती है।
दूसरी किश्त ₹2,000 बच्चे के जन्म और पंजीकरण के बाद, तथा सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (UIP) के अंतर्गत 14 सप्ताह तक के सभी अनिवार्य टीकाकरण पूरे होने पर प्रदान की जाती है।
PMMVY के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक या डाकघर खातों में सीधे भेजी जाती है। इससे पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित होता है।
दिसंबर 2025 तक, PMMVY के अंतर्गत 4.05 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को कवर किया जा चुका है। मातृ पोषण, स्वास्थ्य सेवाओं और टीकाकरण को समर्थन देने के लिए ₹19,000 करोड़ से अधिक की राशि वितरित की गई है, जो इस योजना के व्यापक प्रभाव को दर्शाती है।
योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी के लिए सरकार ने मार्च 2023 में PMMVY सॉफ्टवेयर (PMMVYSoft) लॉन्च किया। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म राष्ट्रीय, राज्य, जिला, ब्लॉक और ग्राम स्तर पर रियल-टाइम निगरानी की सुविधा प्रदान करता है, जिससे प्रभावी पर्यवेक्षण और समयबद्ध शिकायत निवारण संभव हो सका है।
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