प्रधानमंत्री मोदी की साइप्रस यात्रा: तुर्की-पाकिस्तान गठजोड़ के बीच एक रणनीतिक संकेत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 15 जून, 2025 को साइप्रस पहुंचे, जो 20 से अधिक वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री द्वारा इस द्वीप राष्ट्र की पहली यात्रा है। यह यात्रा, जो कनाडा और क्रोएशिया सहित तीन देशों की यात्रा का हिस्सा है, तुर्की और पाकिस्तान के बीच बढ़ते संबंधों के बीच प्रमुख भू-राजनीतिक महत्व रखती है। मोदी की इस यात्रा को यूरोप और भूमध्य सागर में भारत की भागीदारी को गहरा करने, तुर्की की क्षेत्रीय मुखरता का प्रतिकार करने और एक विश्वसनीय सहयोगी के साथ द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।

समाचार में क्यों?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जून 2025 को साइप्रस की ऐतिहासिक यात्रा की, जो बीते 20 वर्षों में किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा है। यह दौरा कनाडा और क्रोएशिया को शामिल करने वाली तीन-देशीय विदेश यात्रा का हिस्सा है। यह कदम तुर्की और पाकिस्तान के बीच बढ़ती नजदीकियों के बीच भारत की पूर्वी भूमध्यसागर में रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने का प्रयास माना जा रहा है।

पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संबंध

  • भारत और साइप्रस के रिश्ते 1960 में साइप्रस की स्वतंत्रता के बाद से मजबूत और स्थिर रहे हैं।

  • साइप्रस ने भारत को समर्थन दिया है:

    • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी

    • भारत-अमेरिका असैनिक परमाणु समझौते को NSG और IAEA जैसे मंचों पर समर्थन

यात्रा की प्रमुख बातें

  • निकोसिया में साइप्रस के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडुलाइड्स के साथ द्विपक्षीय वार्ता

  • लिमासोल में व्यापार जगत को संबोधन, निवेश और आर्थिक साझेदारी को बढ़ावा

  • आतंकवाद विरोधी सहयोग, ऊर्जा क्षेत्र और डिजिटल अवसंरचना में भागीदारी पर ज़ोर

भू-राजनीतिक महत्व

  • तुर्की द्वारा पाकिस्तान के पक्ष में कश्मीर पर समर्थन और सैन्य ड्रोन आपूर्ति ने भारत-तुर्की संबंधों को तनावपूर्ण बना दिया है

  • 1974 से साइप्रस उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों में बँटा हुआ है, जहाँ उत्तर साइप्रस तुर्की के कब्ज़े में है और केवल तुर्की द्वारा मान्यता प्राप्त है

  • भारत का साइप्रस के प्रति झुकाव तुर्की को एक कूटनीतिक संदेश माना जा रहा है

साइप्रस का रणनीतिक और आर्थिक महत्व

  • यूरोप, पश्चिम एशिया और अफ्रीका के चौराहे पर स्थित साइप्रस लॉजिस्टिक्स और व्यापार गलियारों के लिए अहम है

  • यह इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर (IMEC) का हिस्सा है, जो बहु-मॉडल संपर्क और ऊर्जा साझेदारी को मजबूत करता है

  • जनवरी-जून 2026 में साइप्रस यूरोपीय संघ की परिषद की अध्यक्षता करेगा, जिससे वह भारत के लिए EU में एक महत्वपूर्ण साझेदार बन जाएगा

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

G7 Summit 2026: फ्रांस में दुनिया के 7 सबसे ताकतवर देशों की बैठक, जानिए 13 बड़े फैसले और भारत के लिए क्यों है खास

दुनिया की राजनीति, अर्थव्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े फैसलों का मंच माने जाने…

4 weeks ago

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

2 months ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

2 months ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

2 months ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

2 months ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

2 months ago