PM मोदी ने रचा इतिहास: इंदिरा गांधी का रिकॉर्ड तोड़ बने भारत के दूसरे सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए लगातार प्रधानमंत्री पद पर सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने वाले दूसरे नेता बन गए हैं।  पीएम मोदी ने पूर्व पीएम इंदिरा गांधी के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया। इस दिन मोदी ने लगातार 4,078 दिन देश की बागडोर संभालते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 4,077 दिनों के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इंदिरा गांधी ने 24 जनवरी 1966 से 24 मार्च 1977 तक लगातार प्रधानमंत्री के तौर पर देश की सेवा की थी। हालाँकि, उन्होंने 1980 से 1984 तक एक और कार्यकाल भी पूरा किया था, लेकिन वह दो कार्यकालों के बीच में एक अंतराल था।

जवाहरलाल नेहरू अभी भी नंबर वन

देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू आज भी इस लिस्ट में पहले नंबर पर कायम हैं। उन्होंने आज़ादी के बाद से लेकर 1964 तक लगातार 16 साल और 286 दिन तक प्रधानमंत्री के रूप में देश की सेवा की थी।

पहली बार PM बने नरेंद्र मोदी: 26 मई 2014

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 26 मई 2014 को पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने थे। इसके बाद उन्होंने 2019 में दोबारा और 2024 में तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। प्रधानमंत्री बनने से पहले मोदी 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं, और वे भाजपा के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहने वाले नेता भी रहे हैं। 2014 में भाजपा ने उनके नेतृत्व में ऐतिहासिक जीत दर्ज की और 272 सीटें हासिल कर केंद्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई। 2019 में यह आंकड़ा बढ़कर 303 पहुँच गया। हालाँकि, 2024 में भाजपा को अकेले बहुमत नहीं मिला, लेकिन एनडीए (NDA) के साथ मिलकर पार्टी ने तीसरी बार सरकार बनाई।

महत्त्व

यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अभी भी व्यापक जनसमर्थन प्राप्त है। यह भारतीय राजनीति में उनके नेतृत्व में भाजपा की सतत पकड़ को भी उजागर करती है। उनका लंबा कार्यकाल नीतियों में निरंतरता, शासन में स्थायित्व, और विदेश नीति में सुसंगत दृष्टिकोण सुनिश्चित करने में सहायक रहा है।

राजनीतिक प्रभाव

मोदी की राजनीतिक सफलता ने भारत की राजनीतिक दिशा को काफी हद तक बदल दिया है। उन्होंने सत्ता का केन्द्रीयकरण किया, कार्यपालिका को सुदृढ़ किया और भारत की वैश्विक छवि निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में राष्ट्रवादी राजनीतिक विमर्श को बल मिला है और कई चुनावी सुधारों को भी गति मिली है।

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vikash

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