प्रधानमंत्री मोदी ने डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन शताब्दी सम्मेलन का उद्घाटन किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली के पूसा में भारत रत्न डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन शताब्दी अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन किया, जिसमें भारत की हरित क्रांति के जनक और दूरदर्शी कृषि वैज्ञानिक की विरासत को सम्मानित किया गया। 7 से 9 अगस्त तक आयोजित यह तीन दिवसीय आयोजन डॉ. स्वामीनाथन की शताब्दी का उत्सव है, जिसका विषय है—“सदाबहार क्रांति – जैव-सुख की राह।” यह सम्मेलन एम. एस. स्वामीनाथन रिसर्च फाउंडेशन, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जा रहा है।

भारत की हरित क्रांति के जनक को स्मरण

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, जिन्होंने समारोह की अध्यक्षता की, ने डॉ. एम. एस. स्वामीनाथन को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपना जीवन भूख मिटाने और किसानों को सशक्त बनाने के मिशन को समर्पित किया।

उन्होंने कहा, “दूसरों के लिए जीना ही जीवन का सार है, और डॉ. स्वामीनाथन ने राष्ट्र के लिए जीवन जिया। उनके मार्ग का अनुसरण करके हम सुनिश्चित कर सकते हैं कि कोई भी भूख या अभाव से पीड़ित न हो।”

श्री चौहान ने याद दिलाया कि किस प्रकार 1942–43 के बंगाल अकाल ने स्वामीनाथन को कृषि अनुसंधान के लिए प्रेरित किया, जिसके परिणामस्वरूप 1960 के दशक में संकर गेहूं की किस्मों का विकास हुआ जिसने भारतीय कृषि को बदल दिया। 1966 में 18,000 टन मैक्सिकन गेहूं का आयात करने से लेकर मात्र एक वर्ष में गेहूं उत्पादन 5 मिलियन टन से बढ़कर 17 मिलियन टन हो गया—यह डॉ. स्वामीनाथन की दृष्टि से प्रेरित क्रॉस-ब्रीडिंग प्रयासों का परिणाम था।

प्रधानमंत्री मोदी की दृष्टि: लैब से खेत तक

प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि और विज्ञान के एकीकरण की वकालत की, विशेषकर “लैब टू लैंड” अभियान के माध्यम से। प्रधानमंत्री की सलाह पर कई पहलें शुरू की गईं, जिनमें शामिल हैं—

  • लैब टू लैंड पहल

  • कृषि चौपाल

  • विकसित कृषि संकल्प अभियान, जिसके तहत 2,170 वैज्ञानिक टीमों ने 64,000 से अधिक गांवों का दौरा किया और 1 करोड़ से अधिक किसानों से सीधे संवाद किया।

खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास

भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा गया कि—

  • भारत आज चावल में अधिशेष और गेहूं में आत्मनिर्भर है।

  • मजबूत अनाज भंडारण प्रणाली विकसित की जा रही है।

  • 80 करोड़ लोगों को खाद्य सुरक्षा योजनाओं के तहत मुफ्त राशन मिल रहा है।

  • भविष्य में दलहन और तिलहन की उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता है, विशेषकर सोयाबीन, मूंगफली, सरसों, तिल, चना, उड़द, अरहर और मसूर जैसी फसलों में।

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में भारत वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर: IRENA

वर्ष 2025 में, भारत दुनिया के तीसरे सबसे बड़े नवीकरणीय ऊर्जा बाज़ार के रूप में…

9 hours ago

मिशन मित्र क्या है? गगनयान के लिए ISRO का नया प्रयोग—पूरी जानकारी

भारत के गगनयान मिशन ने लद्दाख की बेहद कठिन परिस्थितियों में एक अनोखा प्रयोग शुरू…

11 hours ago

NCERT को मिला ‘डीम्ड यूनिवर्सिटी’ का दर्जा: भारत की शिक्षा व्यवस्था के लिए इसका क्या मतलब है?

केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की सलाह पर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण…

11 hours ago

E20 पेट्रोल क्या है? 2026 से पूरे देश में लागू नई व्यवस्था

1 अप्रैल से, पूरे देश में फ़्यूल स्टेशन अब ऐसा पेट्रोल सप्लाई कर रहे हैं…

11 hours ago

कक्षा तीन से आठ के लिए CT और AI करिकुलम लॉन्च: CBSE

सीबीएसई बोर्ड के मान्यता प्राप्त स्कूलों से लेकर 22 राज्यों के सरकारी स्कूलों के कक्षा…

15 hours ago

सैंड आर्टिस्ट सुदर्शन पटनायक भारत जनगणना 2027 के ब्रांड एंबेसडर नियुक्त

भारत सरकार ने मशहूर रेत कलाकार सुदर्शन पटनायक को जनगणना 2027 के लिए ब्रांड एंबेसडर…

15 hours ago