प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच 22 मार्च 2026 को कैबिनेट कमिटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की अहम बैठक की अध्यक्षता की। प्रधानमंत्री आवास पर तीन घंटे से ज्यादा देर तक चली इस बैठक में मौजूदा हालात, उसके भारत पर असर और सरकार की तैयारियों का व्यापक आकलन किया गया। कैबिनेट सेक्रेटरी ने वैश्विक स्थिति और अब तक उठाए गए कदमों पर डिटेल में प्रेजेंटेशन दिया।
सीसीएस की बैठक के दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा हुई उनमें कृषि, फर्टिलाइजर, फूड सिक्योरिटी, पेट्रोलियम, पावर, MSME, एक्सपोर्ट, शिपिंग और सप्लाई चेन जैसे अहम सेक्टर शामिल रहे। मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष का इन सेक्टर्स पर पड़ने वाले असर और उससे निपटने के उपायों पर बैठक में चर्चा हुई। सरकार ने साफ किया कि बदलते हालात का असर शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म में देखने को मिल सकता है। आम नागरिकों के लिए जरूरी खाद्य वस्तुओं और ईंधन की उपलब्धता को प्राथमिकता दी गई।
कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की बैठक में प्रधानमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि सरकार के सभी अंग सही नजरिया अपनाकर नागरिकों को इस संकट के प्रभाव से सुरक्षित रखें। बैठक में भोजन, ऊर्जा और ईंधन सुरक्षा पर चर्चा हुई। किसानों के लिए खरीफ सीजन के लिए खाद की आवश्यकता का आकलन किया गया। PM ने आश्वस्त किया कि पिछले सालों में बनाए गए स्टॉक के कारण खाद की कोई कमी नहीं होगी। भविष्य के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त देश के सभी पावर प्लांटों में कोयले का पर्याप्त स्टॉक सुनिश्चित करने का फैसला लिया गया, ताकि देश में बिजली की कोई किल्लत न हो।
प्रधानमंत्री ने राज्य सरकारों के साथ उचित समन्वय के निर्देश दिए हैं ताकि युद्ध की आड़ में जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी और जमाखोरी न हो सके। उन्होंने कहा कि नागरिकों को कम से कम असुविधा होनी चाहिए। PM मोदी ने इस संकट से निपटने के लिए एक डेडीकेटेड ‘ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स’ और सचिवों के समूह के गठन का निर्देश दिया है। यह समूह अलग-अलग सेक्टर के हितधारकों के साथ मिलकर काम करेगा।
पीएम हाउस पर हुई इस हाई लेवल मीटिंग में 13 कैबिनेट मंत्री भी मौजूद थे। इसमें गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन, विदेश मंत्री एस जयशंकर, पीयूष गोयल, हरदीप सिंह पुरी, प्रह्लाद जोशी, अश्विनी वैष्णव, के राम मोहन नायडू, जे पी नड्डा, सर्वानंद सोनोवाल, मनोहर लाल खट्टर और शिवराज सिंह चौहान शामिल थे। इसके अतिरिक्त बैठक में एनएसए अजीत डोभाल और पीएम के दोनों प्रिंसिपल सेक्रेटरी भी मौजूद रहे।
अमेरिका और इसराइल द्वारा ईरान पर 28 फरवरी को हमला किए जाने के बाद युद्ध की शुरुआत हुई। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इसराइल और खाड़ी क्षेत्र के अपने कई पड़ोसी देशों पर हमला किया। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बाधित कर दिया है, जो एक प्रमुख समुद्री मार्ग है और इसके जरिए दुनिया की 20 प्रतिशत ऊर्जा की ढुलाई होती है। इसके कारण भारत समेत कई देशों में ऊर्जा आपूर्ति में गंभीर व्यवधान पैदा हो गया।
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