पेरू ने लीमा में 30 दिन के आपातकाल की घोषणा की

अपराध की बढ़ती घटनाओं और जन असंतोष के चलते पेरू के राष्ट्रपति जोसे जेरी (José Jeri) ने देश की राजधानी लीमा (Lima) और कयाओ (Callao) प्रांत में 30 दिनों का आपातकाल (State of Emergency) घोषित किया है। यह आदेश आधी रात के बाद से प्रभावी हो गया, जिसके तहत अब पेरू की सशस्त्र सेनाएँ (Peruvian Armed Forces) पुलिस की मदद से कानून और व्यवस्था बनाए रखने में तैनात रहेंगी। यह निर्णय देशभर में सार्वजनिक सुरक्षा की बिगड़ती स्थिति और हालिया हिंसक प्रदर्शनों के बाद लिया गया है, जिनमें एक व्यक्ति की मौत और 100 से अधिक लोग घायल हुए थे।

आपातकाल की घोषणा के पीछे कारण

  • पिछले एक सप्ताह से अपराध और सरकारी निष्क्रियता के खिलाफ देशभर में हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे।

  • नागरिकों ने सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता की मांग को लेकर सड़कों पर उतरकर विरोध जताया।

  • ये प्रदर्शन हिंसा में बदल गए, जिससे कई लोग घायल हुए और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

  • स्थिति को नियंत्रण में लाने और जन विश्वास बहाल करने के लिए सरकार ने आपातकाल लागू करने का निर्णय लिया।

सरकार का रुख: “रक्षा से आक्रमण की ओर”

राष्ट्रपति जोसे जेरी ने देश के नाम टेलीविज़न संबोधन में कहा —

“हम अपराध के खिलाफ लड़ाई में रक्षा से आक्रमण की ओर बढ़ रहे हैं। यह कदम हमें शांति, स्थिरता और पेरूवासियों के विश्वास को फिर से हासिल करने में मदद करेगा।”

यह कदम मंत्रिपरिषद (Council of Ministers) की मंज़ूरी के बाद उठाया गया, जिसके तहत सैन्य बलों को शहरी क्षेत्रों में पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा सुनिश्चित करने की अनुमति दी गई है।

आपातकाल के तहत सरकार को मिले अधिकार

आपातकाल की स्थिति में सरकार को कुछ नागरिक स्वतंत्रताओं को अस्थायी रूप से निलंबित करने की अनुमति मिलती है, जिनमें शामिल हैं —

  • आवागमन और सभा की स्वतंत्रता पर अस्थायी प्रतिबंध, यदि सार्वजनिक सुरक्षा के लिए आवश्यक समझा जाए।

  • बिना अदालत की पूर्व स्वीकृति के तलाशी और जब्ती की व्यापक शक्तियाँ।

  • सैन्य बलों की तैनाती आंतरिक सुरक्षा संचालन के लिए।

हालाँकि संचालन से संबंधित विस्तृत जानकारी साझा नहीं की गई है, लेकिन यह अपेक्षित है कि लीमा और कयाओ के अपराध-प्रवण क्षेत्रों में सेना गश्त करेगी, चेकपॉइंट स्थापित करेगी, और त्वरित प्रतिक्रिया इकाइयों की सहायता करेगी।

बढ़ता अपराध और जनता में भय

  • पिछले कुछ महीनों में लीमा में सशस्त्र लूट, गिरोह गतिविधियाँ और हत्या के मामलों में तेज़ वृद्धि हुई है।

  • कयाओ, जो ऐतिहासिक रूप से मादक पदार्थ तस्करी और संगठित अपराध से जुड़ा रहा है, वहाँ भी गैंग हिंसा और वसूली की घटनाएँ बढ़ी हैं।

  • नागरिकों ने पुलिस और न्याय प्रणाली की अक्षमता पर नाराज़गी व्यक्त की है।

कई लोगों का मानना है कि यह आपातकाल जरूरी लेकिन जोखिम भरा कदम है — जो सार्वजनिक सुरक्षा बहाल करने में मदद कर सकता है, परंतु लोकतांत्रिक अधिकारों पर अस्थायी प्रभाव भी डाल सकता है।

निष्कर्ष

पेरू सरकार का यह निर्णय बढ़ते अपराध और असुरक्षा की भावना के बीच कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण दोबारा पाने का प्रयास है।
राष्ट्रपति जेरी की यह नीति “रक्षा से आक्रमण” की दिशा में बदलाव का संकेत देती है, जो आने वाले हफ्तों में देश की आंतरिक स्थिरता और लोकतांत्रिक संतुलन की बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।

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vikash

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