व्यक्तिगत ऋण, कृषि और उद्योग पर गहराया संकट — RBI के आंकड़े क्या बताते हैं

भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के अनुसार, भारत की बैंक ऋण वृद्धि जून 2025 में घटकर 10.2% रह गई, जो जून 2024 में 13.8% थी। यह गिरावट सभी प्रमुख क्षेत्रों – कृषि, उद्योग, सेवा क्षेत्र और व्यक्तिगत ऋण – में देखी गई। कृषि ऋण में भारी गिरावट आई और यह 6.8% पर आ गया, उद्योग क्षेत्र में यह 5.5% पर आ गया, सेवा क्षेत्र में यह 9.6% पर आ गया, और व्यक्तिगत ऋण वृद्धि धीमी होकर 14.7% पर आ गई। यह मंदी, सतर्क उधारी और क्षेत्रीय चुनौतियों के बीच कमजोर ऋण मांग को दर्शाती है।

ऋण वृद्धि में गिरावट

कुल ऋण वृद्धि में गिरावट
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जून 2025 में देश की बैंक ऋण वृद्धि दर घटकर 10.2% रह गई, जबकि यह जून 2024 में 13.8% थी। यह महत्वपूर्ण गिरावट बताती है कि प्रमुख आर्थिक क्षेत्रों में कर्ज की मांग धीमी हो रही है।

इस गिरावट का मतलब है कि व्यवसाय, घरेलू उपभोक्ता और सेवा प्रदाता कम कर्ज ले रहे हैं — इसकी वजह उच्च ब्याज दरें, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और कड़े वित्तीय हालात हो सकते हैं।

कृषि और संबद्ध गतिविधियाँ: ऋण मांग में तेज गिरावट

कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों में ऋण वृद्धि दर जून 2025 में घटकर 6.8% रह गई, जबकि पिछले वर्ष यह 17.4% थी।

यह गिरावट ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश की कमी, मानसून की अनिश्चितता और किसानों की बढ़ती सतर्कता को दर्शा सकती है। किसानों का ऋण लेने से झिझकना कीमतों में उतार-चढ़ाव और उत्पादन लागत के जोखिमों का संकेत हो सकता है।

औद्योगिक ऋण: मिश्रित रुझान, लेकिन एमएसएमई बना सहारा

औद्योगिक क्षेत्र में ऋण वृद्धि दर जून 2025 में घटकर 5.5% रह गई, जो जून 2024 में 7.7% थी। हालांकि, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) ने स्थिर वृद्धि दिखाई।

इंजीनियरिंग, निर्माण और वस्त्र उद्योग जैसे क्षेत्रों में ऋण मांग में तेजी रही, जो दर्शाता है कि कुछ उद्योग अभी भी लचीले बने हुए हैं, भले ही समग्र औद्योगिक गतिविधि धीमी हो गई हो।

सेवा क्षेत्र: एनबीएफसी के कारण धीमापन

भारत की अर्थव्यवस्था के प्रमुख चालक सेवा क्षेत्र में ऋण वृद्धि जून 2025 में घटकर 9.6% हो गई, जो पिछले वर्ष 15.1% थी। इस गिरावट का मुख्य कारण गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) को कम ऋण मिलना रहा। हालांकि, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और प्रोफेशनल सेवाओं जैसे क्षेत्रों में अच्छी वृद्धि देखी गई, जो ज्ञान-आधारित क्षेत्रों में मजबूत मांग को दर्शाता है।

निजी ऋण: उपभोक्ता मांग में ठंडापन

निजी ऋणों में वृद्धि दर जून 2025 में घटकर 14.7% रह गई, जबकि जून 2024 में यह 16.6% थी। इस गिरावट की प्रमुख वजह वाहन ऋण, क्रेडिट कार्ड खर्च, और अन्य व्यक्तिगत ऋणों की मांग में कमी रही। इससे उपभोक्ताओं की सतर्क मानसिकता और महंगाई व उच्च ब्याज दरों के प्रभाव का पता चलता है।

भारत की अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने हैं?

कुल मिलाकर ऋण वृद्धि में आई यह गिरावट खपत और निवेश में संभावित मंदी का संकेत देती है। हालांकि MSMEs, इंजीनियरिंग और आईटी सेवाओं जैसे क्षेत्रों में लचीलापन बना हुआ है, पर कृषि और निजी ऋणों में गिरावट आने वाले तिमाहियों में आर्थिक गति पर असर डाल सकती है

[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

ऑस्कर 2026 नामांकन: सर्वश्रेष्ठ फिल्म, अभिनेता और अभिनेत्री की पूरी सूची जारी

98th Academy Awards के लिए नामांकन की घोषणा कर दी गई है, जिसमें फिल्म निर्माण…

11 hours ago

सूर्या मिधा ने तोड़ा मार्क ज़करबर्ग का रिकॉर्ड, बने सबसे युवा सेल्फ मेड बिलियनेयर

फोर्ब्स की वर्ल्ड्स बिलियनेयर्स लिस्ट में शामिल होने वाले भारतीय मूल के 22वर्षीय सूर्या मिधा…

12 hours ago

चिराग पासवान ने असम में PMFME इनक्यूबेशन सेंटर का शुभारंभ किया

केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने 13 मार्च 2026 को सोनितपुर जिले के…

13 hours ago

इसरो की बड़ी सफलता: CE-20 क्रायोजेनिक इंजन का सफल परीक्षण

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने रॉकेट प्रौद्योगिकी में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते…

13 hours ago

उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रक्षेपण से जापान में अलर्ट, संकट प्रबंधन टीम सक्रिय

उत्तर कोरिया ने 14 मार्च 2026 को पूर्वी सागर की ओर करीब 10 बैलिस्टिक मिसाइलें…

13 hours ago

डिजिटल मैपिंग को बढ़ावा: सुजल गांव आईडी का शुभारंभ

जल शक्ति मंत्रालय ने जल जीवन मिशन (JJM) 2.0 के तहत भारत के हर ग्रामीण…

14 hours ago