राष्ट्रीय पेंशनर्स दिवस 2024: जानें सबकुछ

भारत में 17 दिसंबर को प्रतिवर्ष पेंशनर्स डे मनाया जाता है, जो डी.एस. नकरा को श्रद्धांजलि है, जिन्होंने पेंशनभोगियों के अधिकारों और सम्मान के लिए संघर्ष किया। यह दिन 1982 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले की याद दिलाता है, जिसने सेवानिवृत्त अधिकारियों के लिए समानता और न्याय सुनिश्चित किया।

पेंशनर्स डे का इतिहास

1982 में सुप्रीम कोर्ट ने डी.एस. नकरा द्वारा दायर याचिका पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। यह मामला पेंशन लाभों के भेदभावपूर्ण नियमों के खिलाफ था।

  • पृष्ठभूमि: 1979 में लागू उदार पेंशन प्रणाली का लाभ केवल 31 मार्च, 1979 के बाद सेवानिवृत्त हुए कर्मचारियों को दिया गया।
  • फैसला: सुप्रीम कोर्ट ने इस भेदभाव को असंवैधानिक घोषित किया और सभी पेंशनभोगियों के लिए समान पेंशन लाभ सुनिश्चित किए। इसे “पेंशनभोगियों का मैग्ना कार्टा” कहा गया।

भारत में पेंशन प्रणाली का इतिहास

  1. औपनिवेशिक काल: ब्रिटिश शासन में 1881 में सरकारी कर्मचारियों के लिए पहली बार पेंशन योजना शुरू की गई।
  2. पूर्व-स्वतंत्रता काल: 1919 और 1935 के अधिनियमों के तहत पेंशन का विस्तार किया गया।
  3. स्वतंत्रता के बाद:
    • 1972 का पेंशन अधिनियम: केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियम लागू हुए।
    • कर्मचारियों को 33 वर्षों की सेवा पर औसत वेतन का 50% पेंशन के रूप में मिलता था।

पेंशनभोगियों की चुनौतियाँ

  1. भागीदारी पेंशन योजना: 1 जनवरी 2004 से नई भर्ती कर्मचारियों के लिए लागू की गई।
  2. PFRDA अधिनियम, 2013: पेंशन फंड के विनियमन और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) की शुरुआत की गई।
  3. 7वां वेतन आयोग: कुछ सीमित लाभ प्रदान किए गए, लेकिन पेंशनभोगियों की पूर्ण समानता की मांग अस्वीकार कर दी गई।
  4. कोविड-19 महामारी: जनवरी 2020 से जून 2021 तक पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता (DA) फ्रीज कर दिया गया, जिससे आर्थिक दबाव बढ़ा।

एकीकृत पेंशन योजना (UPS) 2024

  • अगस्त 2024 में केंद्रीय कैबिनेट ने एकीकृत पेंशन योजना को मंजूरी दी।
  • यह योजना पेंशन नीतियों को सुव्यवस्थित कर वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता प्रदान करती है।

भारत में पेंशन योजनाओं की विशेषताएँ

  1. निश्चित आय: पेंशन योजनाएँ सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय सुनिश्चित करती हैं।
    • Deferred Plans: निवेश अवधि के बाद आय शुरू होती है।
    • Immediate Plans: निवेश के तुरंत बाद आय शुरू होती है।
  2. कर लाभ: आयकर अधिनियम, 1961 के तहत विभिन्न योजनाओं पर कर छूट मिलती है (धारा 80C, 80CCC और 80CCD)।
  3. तरलता विकल्प: कुछ योजनाओं में आपातकालीन स्थिति में आंशिक निकासी की सुविधा होती है।
  4. वेस्टिंग आयु: 45-50 वर्ष की न्यूनतम आयु पर पेंशन प्राप्त करना शुरू किया जा सकता है।
  5. संचय अवधि: निवेश शुरू करने और सेवानिवृत्ति तक की अवधि।
  6. भुगतान अवधि: सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन भुगतान की अवधि।
  7. समर्पण मूल्य: समय से पहले योजना छोड़ने पर सभी लाभों का नुकसान होता है।

महत्व: पेंशन योजनाएँ वित्तीय आत्मनिर्भरता, दीर्घकालिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता प्रदान करती हैं, जिससे सेवानिवृत्त जीवन सम्मानजनक और सुरक्षित बनता है।

सारांश/स्थिर विवरण विवरण
क्यों चर्चा में? पेंशनर्स डे प्रतिवर्ष 17 दिसंबर को मनाया जाता है। यह डी.एस. नकरा के पेंशन समानता के लिए संघर्ष और 1982 के ऐतिहासिक सुप्रीम कोर्ट निर्णय को समर्पित है।
पेंशनर्स डे का इतिहास यह दिन सुप्रीम कोर्ट के 1982 के निर्णय की याद दिलाता है, जिसमें डी.एस. नकरा (सेवानिवृत्त रक्षा विभाग अधिकारी) द्वारा 1979 के भेदभावपूर्ण पेंशन नियमों को चुनौती दी गई थी।
पेंशन प्रणाली की उत्पत्ति औपनिवेशिक युग: 1881 में रॉयल कमीशन द्वारा पेंशन प्रणाली शुरू की गई। पूर्व-स्वतंत्रता: 1919 और 1935 के अधिनियमों के तहत सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों को पेंशन लाभ मिले।
स्वतंत्रता पश्चात सुधार 1972 के केंद्रीय सिविल सेवा (पेंशन) नियमों के तहत केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति लाभ दिए गए। 33 वर्षों की सेवा पर अंतिम 36 महीनों के औसत वेतन का 50% पेंशन के रूप में निर्धारित किया गया।
1982 का सुप्रीम कोर्ट निर्णय सभी पेंशनभोगियों को समान पेंशन का लाभ मिला, सेवानिवृत्ति तिथि पर आधारित भेदभाव समाप्त हुआ। यह निर्णय सशस्त्र बलों के कर्मचारियों पर भी लागू हुआ। इसे “पेंशनभोगियों का मैग्ना कार्टा” कहा गया।
पेंशनभोगियों की चुनौतियाँ 1. भागीदारी पेंशन योजना (2004): नई नियुक्तियों के लिए लागू; पुराने कर्मचारी अस्थायी रूप से बाहर थे। 2. PFRDA अधिनियम (2013): NPS के तहत पेंशन फंडों को विनियमित किया गया।
7वां वेतन आयोग सीमित लाभों के साथ मामूली सुधार। कोविड-19 (जनवरी 2020-जून 2021) के दौरान महंगाई भत्ता फ्रीज होने से आर्थिक दबाव पड़ा।
एकीकृत पेंशन योजना (2024) अगस्त 2024 में मंजूर की गई यह योजना पेंशन नीतियों को सरल बनाने और पेंशनभोगियों के लिए वित्तीय सुरक्षा सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखती है।
पेंशन योजनाओं की विशेषताएँ 1. निश्चित आय: सेवानिवृत्ति के बाद नियमित आय। 2. कर लाभ: धारा 80C, 80CCC और 80CCD के तहत कर छूट। 3. तरलता: सीमित निकासी की सुविधा। 4. वेस्टिंग आयु: 45-70 वर्ष, कुछ योजनाओं में 90 वर्ष तक। 5. संचय अवधि: निवेश की अवधि (जैसे 30-60 वर्ष)। 6. भुगतान अवधि: पेंशन भुगतान की अवधि (जैसे सेवानिवृत्ति के बाद 15 वर्ष)। 7. समर्पण मूल्य: समय से पहले योजना छोड़ने पर लाभ का नुकसान।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

व्यापार सूचकांकों का आधार वर्ष बदलकर 2022-23 किया गया

भारत सरकार ने भारत के मर्चेंडाइज ट्रेड इंडेक्स (Merchandise Trade Indices) का आधार वर्ष 2012-13…

22 hours ago

कौन हैं आशा शर्मा? जो संभालेंगी Microsoft Gaming की कमान

माइक्रोसॉफ्ट ने 2026 में एक बड़े नेतृत्व परिवर्तन के तहत भारतीय मूल की अधिकारी आशा…

22 hours ago

हरशरण कौर त्रेहन PSPCL की पहली महिला डायरेक्टर (कमर्शियल) बनीं

हरशरण कौर त्रेहन को पंजाब राज्य विद्युत निगम लिमिटेड (PSPCL) में निदेशक (वाणिज्यिक) नियुक्त किया…

23 hours ago

रेलवे हुआ स्मार्ट! शिकायत निवारण और भीड़ प्रबंधन के लिए एआई-सक्षम ऐप्स की शुरुआत

भारतीय रेलवे ने शिकायत निवारण, टिकट कन्फर्मेशन की भविष्यवाणी, हाउसकीपिंग सेवाओं और भीड़ प्रबंधन को…

23 hours ago

मेड इन इंडिया: नड्डा ने कसौली सेंटर में स्वदेशी टीडी वैक्सीन लॉन्च की

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने हिमाचल प्रदेश के सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट में देश…

23 hours ago