पंचायती राज मंत्रालय ने राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस (24 अप्रैल) के अवसर पर ‘पंचायत उन्नति सूचकांक’ (PAI) 2.0 रिपोर्ट जारी की थी। यह रिपोर्ट ग्रामीण विकास के क्षेत्र में हुई ज़बरदस्त प्रगति को दर्शाती है, जिसमें 3,635 ग्राम पंचायतें ‘अग्रणी’ (Front Runners) के रूप में उभरकर सामने आई हैं। पूरे देश से रिकॉर्ड 97.3% भागीदारी के साथ, ‘इंडिया PAI 2.0’ एक व्यापक ‘प्रदर्शन रिपोर्ट कार्ड’ के रूप में कार्य करता है; यह आजीविका, स्वास्थ्य, सुशासन और सामाजिक विकास जैसे कई प्रमुख क्षेत्रों में ज़मीनी स्तर पर हुई प्रगति को प्रदर्शित करता है।
पंचायत उन्नति सूचकांक 2.0 (PAI 2.0) पूरे भारत में ग्रामीण शासन के प्रदर्शन का विस्तृत मूल्यांकन प्रस्तुत करता है। इसमें भारत के 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की 2.59 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को शामिल किया गया है, जो इसे देश के सबसे बड़े डेटा-आधारित शासन अभ्यासों में से एक बनाता है।
कुल भाग लेने वाली पंचायतों में से,
यह वर्गीकरण, बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायतों और उन पंचायतों की पहचान करने में मदद करेगा जिन्हें विशेष सहायता की आवश्यकता है।
PAI 2.0 ने 97.30% की प्रभावशाली भागीदारी दर हासिल की है, जो PAI 1.0 की 80.79% दर से एक बड़ा सुधार है। कुल 2,59,867 ग्राम पंचायतों ने सत्यापित डेटा जमा किया।
इस अपडेटेड वर्शन में कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए हैं:
इन बदलावों ने इस सिस्टम को और अधिक कुशल, पारदर्शी और उपयोगकर्ता-अनुकूल बना दिया है।
यह रिपोर्ट ‘सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण’ (LSDGs) के तहत प्रमुख विकास विषयों में हुए मज़बूत प्रदर्शन को उजागर करती है।
गरीबी-मुक्त और बेहतर आजीविका
इस विषय के अंतर्गत कुल 3,313 ग्राम पंचायतों ने ‘A+’ ग्रेड हासिल किया है, जो इन क्षेत्रों में हुई महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है:
स्वस्थ पंचायतें
इस श्रेणी में कुल मिलाकर लगभग 1,015 पंचायतों ने ‘A+’ ग्रेड हासिल किया, जो इन क्षेत्रों में हुए सुधारों का संकेत है:
पंचायत उन्नति सूचकांक भारत का पहला राष्ट्रव्यापी, डेटा-आधारित ढांचा है, जिसका उद्देश्य देश की ग्राम पंचायतों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करना है।
यह पंचायतों का मूल्यांकन निम्नलिखित आधारों पर करता है:
PAI 1.0 की तुलना में—जिसमें 500 से अधिक संकेतक थे—PAI 2.0 को बेहतर उपयोगिता और अधिक सटीक फोकस के लिए सरल बनाया गया है।
समग्र अंकों के आधार पर, इन पंचायतों को पाँच श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है।
यह ग्रेडिंग प्रणाली स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देती है और सरकारों को उन क्षेत्रों की पहचान करने में मदद करती है जिनमें सुधार की आवश्यकता है।
यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में व्यापक भागीदारी को उजागर करती है, जिन्होंने बड़ी संख्या में पंचायतों का योगदान दिया है।
केरल और त्रिपुरा जैसे राज्यों ने उच्च श्रेणियों में मज़बूत प्रदर्शन दिखाया, जो प्रभावी स्थानीय शासन मॉडलों का संकेत है।
हालाँकि, कुछ क्षेत्रों में अभी भी ‘आकांक्षी’ (Aspirant) और ‘शुरुआती’ (Beginner) श्रेणियों में पंचायतों की संख्या अधिक है, और यह लक्षित हस्तक्षेपों की आवश्यकता को दर्शाता है।
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