पलामू टाइगर रिजर्व (Palamu Tiger Reserve) ने ग्रामीण महिलाओं को वन और वन्यजीव संरक्षण में सशक्त बनाने के उद्देश्य से ‘वनजीवी दीदी पहल’ (Vanjeevi Didi Initiative) शुरू की है। यह सामुदायिक आधारित संरक्षण कार्यक्रम 17 वन-सीमावर्ती गांवों में लागू किया गया है। इस पहल के तहत प्रत्येक गांव से 18 महिलाओं को शिकार (पोचिंग) रोकने, वनों की कटाई कम करने और पर्यावरण-अनुकूल आजीविका को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। झारखंड वन विभाग (Jharkhand Forest Department) द्वारा शुरू किया गया यह पायलट कार्यक्रम जमीनी स्तर पर पर्यावरणीय प्रशासन को मजबूत करने और संवेदनशील वन क्षेत्रों में एक सशक्त नागरिक निगरानी तंत्र विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Palamu Tiger Reserve द्वारा शुरू की गई वनजीवी दीदी पहल (Vanjeevi Didi Initiative – VDI) एक सामुदायिक आधारित वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को वन संरक्षण और जैव विविधता सुरक्षा में सक्रिय भागीदार बनाना है।
प्रमुख विशेषताएँ
यह पहल महिलाओं को जमीनी स्तर पर वन प्रशासन और जैव विविधता संरक्षण से जोड़ती है।
इस कार्यक्रम का मुख्य फोकस सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करना है।
मुख्य उद्देश्य
इस पहल के माध्यम से स्थानीय महिलाएं “वन दूत” (Forest Ambassadors) के रूप में कार्य कर प्रशासन और समुदाय के बीच सेतु का काम करती हैं।
चयनित प्रतिभागियों को कई महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभानी होती हैं।
प्रमुख कर्तव्य
इस पहल से सामाजिक दबाव भी बढ़ा है, जिसके परिणामस्वरूप कुछ गांवों में अवैध हथियारों का स्वैच्छिक समर्पण हुआ है।
स्टाफ की कमी का समाधान
पलामू टाइगर रिजर्व में लगभग 95% फ्रंटलाइन पद रिक्त रहे हैं। 306 सदस्यीय नागरिक नेटवर्क निगरानी को मजबूत करता है।
वैकल्पिक आजीविका मॉडल
₹3,000 मासिक प्रोत्साहन से अवैध वन निर्भरता कम होती है और महिलाएं वैध आय स्रोतों को बढ़ावा देती हैं।
वन्यजीव अपराध में कमी
महिलाओं का परिवार और समुदाय पर प्रभाव होता है, जिससे अवैध हथियार और शिकार जैसी गतिविधियों में कमी आई है।
प्रमुख प्रजातियों का संरक्षण
पलामू टाइगर रिजर्व में:
वनजीवी दीदी पहल आवास संरक्षण, स्वच्छता अभियान और नदी संगम क्षेत्रों के संरक्षण में भी सहयोग कर रही है।
कुल मिलाकर, यह पहल ग्रामीण महिलाओं को संरक्षण की अग्रिम पंक्ति में लाकर वन शासन को अधिक सहभागी, प्रभावी और टिकाऊ बना रही है।
| विशेषता | विवरण |
| स्थान | झारखंड |
| स्थापना | 1974 (प्रोजेक्ट टाइगर के अंतर्गत) |
| कुल क्षेत्रफल | 1,129.93 वर्ग किमी |
| कोर क्षेत्र | 414.08 वर्ग किमी |
| बफर क्षेत्र | 715.85 वर्ग किमी |
| प्रमुख नदियाँ | नॉर्थ कोयल, औरंगा, बुरहा |
| वनस्पति | उत्तरी उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती साल वन |
| विशेष उपलब्धि | 1932 में पदचिह्न (Pugmark) के माध्यम से पहला बाघ गणना |
पलामू टाइगर रिजर्व में महुआदानर में भारत का एकमात्र भेड़िया अभ्यारण्य भी है और इसमें चेरो राजवंश के किले भी हैं।
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