महान स्पिनर पद्माकर शिवालकर का निधन

भारतीय क्रिकेट ने अपने सबसे बेहतरीन बाएं हाथ के स्पिनरों में से एक पद्माकर शिवलकर को खो दिया, जिनका मुंबई में 84 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मुंबई क्रिकेट के दिग्गज रहे शिवलकर एक असाधारण गेंदबाज थे, जिनका घरेलू क्रिकेट में योगदान आज भी याद किया जाता है। हालांकि, उनकी प्रतिभा के बावजूद उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व करने का अवसर नहीं मिला, क्योंकि उस समय बिशन सिंह बेदी भारतीय टीम के प्रमुख बाएं हाथ के स्पिनर थे। उनका निधन मुंबई के पूर्व कप्तान मिलिंद रेगे के देहांत के कुछ ही दिनों बाद हुआ, जिससे क्रिकेट जगत शोक में डूब गया है।

मुंबई क्रिकेट के दिग्गज

1960 और 1970 के दशक में जब मुंबई रणजी ट्रॉफी में सबसे मजबूत टीम थी, उस दौर में पद्माकर शिवलकर का गेंदबाजी में दबदबा था। उनकी बाएं हाथ की स्पिन गेंदबाजी ने मुंबई को कई रणजी ट्रॉफी खिताब जिताने में अहम भूमिका निभाई।

अपने शानदार प्रथम श्रेणी करियर में उन्होंने 124 मैच खेले और 589 विकेट चटकाए, जो उनके कौशल और निरंतरता का प्रमाण है।

हालांकि, उनकी शानदार गेंदबाजी के बावजूद उन्हें भारतीय राष्ट्रीय टीम में शामिल होने का मौका नहीं मिला, क्योंकि उस समय बिशन सिंह बेदी भारतीय क्रिकेट में बाएं हाथ के स्पिनर की पहली पसंद थे। लेकिन इस निराशा के बावजूद शिवलकर ने मैदान पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देना जारी रखा और मुंबई क्रिकेट के सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक बने रहे।

कोचिंग के प्रति समर्पित जीवन

क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद, शिवलकर ने कोचिंग की ओर रुख किया और अपनी गहरी समझ और अनुभव को युवा खिलाड़ियों के साथ साझा किया। उन्होंने मुंबई रणजी टीम के कोच के रूप में कार्य किया और भविष्य के सितारों को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में कोचिंग दी, जहां उन्होंने कई युवा प्रतिभाओं को पहचाना और प्रशिक्षित किया। उनमें से हरमीत सिंह भी एक थे, जिन्होंने बाद में भारत अंडर-19, मुंबई और अमेरिका का प्रतिनिधित्व किया।

युवाओं को तराशने की उनकी लगन और समर्पण ने उन्हें एक महान गुरु और मार्गदर्शक के रूप में स्थापित किया।

सम्मान और पुरस्कार

हालांकि उन्हें भारतीय टीम में खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन उनके योगदान को नजरअंदाज नहीं किया गया।

2017 में, बीसीसीआई ने उन्हें “सीके नायडू लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड” से सम्मानित किया। यह सम्मान उन्होंने अपने समकालीन बाएं हाथ के स्पिनर राजेंद्र गोयल के साथ साझा किया। राजेंद्र गोयल की तरह शिवलकर भी अपने अद्भुत घरेलू रिकॉर्ड के बावजूद अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट नहीं खेल पाए थे।

सुनील गावस्कर और MCA ने जताया शोक

क्रिकेट जगत ने शिवलकर के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया।

महान क्रिकेटर सुनील गावस्कर ने अपनी संवेदना व्यक्त की, वहीं मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के अध्यक्ष अजीत नाइक ने कहा:

“मुंबई क्रिकेट ने आज एक सच्चे दिग्गज को खो दिया है। पद्माकर शिवलकर सर का योगदान, खासतौर पर एक शानदार स्पिनर के रूप में, हमेशा याद किया जाएगा। उनकी प्रतिबद्धता, कौशल और मुंबई क्रिकेट पर उनका प्रभाव अतुलनीय है। उनका निधन क्रिकेट जगत के लिए अपूरणीय क्षति है।”

एक ऐसा इंसान, जिसने अपनी तकदीर को मुस्कान के साथ अपनाया

भले ही उन्हें भारतीय टीम में खेलने का मौका नहीं मिला, लेकिन उन्होंने कभी कोई शिकायत नहीं की और न ही किसी तरह का अफसोस जताया।

जब 2017 में उन्हें बीसीसीआई पुरस्कार मिला, तब उन्होंने एक यादगार इंटरव्यू में बॉलीवुड फिल्म “हम दोनों” के एक मशहूर गीत को उद्धृत किया:

“मैं ज़िंदगी का साथ निभाता चला गया, जो मिला उसी को मुकद्दर समझ लिया।”

इन शब्दों ने उनकी संतोषी प्रवृत्ति और क्रिकेट करियर के प्रति उनकी विनम्र दृष्टि को दर्शाया।

उनका योगदान भारतीय क्रिकेट में हमेशा याद रखा जाएगा।

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vikash

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