ओडिशा के प्रख्यात लेखिका और वर्ष 2020 की पद्म श्री पुरस्कार विजेता (2020), बीनापाणी मोहंती का 85 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनका जन्म बरहामपुर में हुआ था। उन्होंने सन्1960 में अर्थव्यवस्था में एक प्रवक्ता (लेक्चरर) के रूप में अपना शिक्षण करियर शुरू किया। उनकी कई लघु कथाओं का अनुवाद हिंदी, अंग्रेजी, कन्नड़, मराठी सहित विभिन्न भाषाओं में किया गया है। उन्होंने ‘ओडिशा लेखिका संसद (Odisha Lekhika Sansad)’ नामक उड़िया महिला लेखकों के एक संगठन की स्थापना की थी।
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कार्य (Her work):
पाता देई, खेला घर, नायकू रास्ता, बस्त्रहरण, अंधकारारा, कस्तूरी मुर्गा ओ सबुजा अरण्य और मिच्छी मिच्छिका उनकी कुछ सबसे प्रसिद्ध कहानियाँ हैं।
प्राप्त पुरस्कार और सम्मान (Awards and Honour she received):
बीनापाणी मोहंती को ओडिया साहित्य में उनके योगदान के लिए वर्ष 2020 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था। उन्हें वर्ष 2019 में ओडिशा साहित्य अकादमी द्वारा सर्वोच्च साहित्यिक पुरस्कार, “आदिबादी जगन्नाथ दास पुरस्कार” से भी सम्मानित किया गया था। उनके लघु कथाओं के संग्रह ‘पटा देई’ ने साहित्य अकादमी पुरस्कार जीता है। उन्हें ओडिशा सरकार से ‘सरला सम्मान’ भी मिला।
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