नीति आयोग ने 25 अरब डॉलर से अधिक निर्यात क्षमता वाली रिपोर्ट जारी की

नीति आयोग ने ‘Unlocking $25+ Billion Export Potential – India’s Hand & Power Tools Sector’ शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है, जिसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार परिदृश्य में भारत के हैण्ड और पावर टूल्स उद्योग की संभावनाओं को उजागर करना है। यह रिपोर्ट दर्शाती है कि यह क्षेत्र भारत की आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देने, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन करने और देश को वैश्विक विनिर्माण हब के रूप में स्थापित करने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है। 2035 तक वैश्विक हैण्ड और पावर टूल्स बाजार के तीव्र विस्तार की संभावना के मद्देनज़र, भारत यदि इस क्षेत्र को रणनीतिक रूप से मजबूत करता है तो अगले दशक में $25 अरब से अधिक के निर्यात और लगभग 35 लाख नए रोजगारों की संभावना बन सकती है। यह रिपोर्ट न केवल आर्थिक दृष्टिकोण से बल्कि परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नीतिगत हस्तक्षेपों, चुनौतियों और अवसरों का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत करती है जो भारत को इस क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी बनाने में सहायक हो सकते हैं।

रिपोर्ट की मुख्य जानकारियाँ 

वैश्विक बाजार और भारत की स्थिति

  • वैश्विक बाजार आकार: वर्तमान में हैंड और पावर टूल्स का वैश्विक बाजार लगभग $100 अरब का है, जो 2035 तक बढ़कर $190 अरब तक पहुँचने का अनुमान है।

  • भारत की हिस्सेदारी: भारत वर्तमान में $600 मिलियन के हैंड टूल्स (1.8%) और $470 मिलियन के पावर टूल्स (0.7%) का निर्यात करता है।

  • चीन की प्रमुखता: चीन इस क्षेत्र में अग्रणी है—हैंड टूल्स में $13 अरब (50%) और पावर टूल्स में $22 अरब (40%) के निर्यात के साथ।

भारत की निर्यात क्षमता

  • लक्ष्य: भारत अगले 10 वर्षों में हैंड टूल्स में 25% और पावर टूल्स में 10% की वैश्विक हिस्सेदारी हासिल कर सकता है, जिससे कुल निर्यात $25 अरब तक पहुँच सकता है।

  • रोजगार: इस लक्ष्य को प्राप्त करने पर लगभग 35 लाख रोजगार सृजित हो सकते हैं, विशेष रूप से निर्माण और निर्यात क्षेत्रों में।

मुख्य चुनौतियाँ

  • लागत की असमानता: भारत को चीन की तुलना में 14-17% की लागत का नुकसान होता है, कारण हैं:

    • उच्च कच्चे माल की लागत (जैसे स्टील, प्लास्टिक, मोटर)।

    • श्रम उत्पादकता कम होना (अधिक वेतन, ओवरटाइम प्रतिबंध)।

    • परिवहन और लॉजिस्टिक्स की अधिक लागत (विशेष रूप से अंतर्देशीय राज्यों से बंदरगाहों तक)।

  • ब्याज दरें और ओवरहेड्स: उच्च ब्याज दरें और परिवहन लागत भी प्रतिस्पर्धात्मकता को प्रभावित करती हैं।

विकास के लिए रणनीतिक हस्तक्षेप

  • विश्वस्तरीय क्लस्टर: हैंड टूल क्लस्टर विकसित करना।

  • PPP मॉडल: सार्वजनिक-निजी भागीदारी के जरिए बुनियादी ढांचे और प्रौद्योगिकी में निवेश।

संरचनात्मक लागत असंतुलन को दूर करना

  • नीति सुधार:

    • क्वालिटी कंट्रोल ऑर्डर (QCO) को सरल बनाना।

    • स्टील जैसे कच्चे माल पर आयात शुल्क घटाना।

    • EPCG स्कीम्स को सरल बनाना।

  • श्रम और भवन नियमों में सुधार: श्रम कानूनों में लचीलापन लाना और भवन निर्माण नियमों को सरल करना।

ब्रिज कॉस्ट सपोर्ट (अस्थायी सहायता)

  • यदि सुधार तुरंत लागू नहीं होते, तो सरकार को ₹8,000 करोड़ की अस्थायी सहायता देनी पड़ सकती है।

  • लेकिन यदि सुधार समय पर होते हैं, तो अतिरिक्त फंडिंग की आवश्यकता नहीं होगी।

  • लाभ: इन सुधारों से अगले 5 वर्षों में सरकार को 2-3 गुना टैक्स रिटर्न मिल सकता है।

विषय विवरण
समाचार में क्यों? नीति आयोग ने “Unlocking $25+ Billion Export Potential” रिपोर्ट जारी की
उपकरणों का वैश्विक बाजार वर्तमान में $100 अरब का, 2035 तक $190 अरब तक पहुँचने का अनुमान
भारत की निर्यात हिस्सेदारी हैंड टूल्स: $600 मिलियन (1.8%), पावर टूल्स: $470 मिलियन (0.7%)
निर्यात लक्ष्य अगले 10 वर्षों में $25 अरब का निर्यात, 35 लाख रोजगार सृजन की संभावना
लागत में नुकसान भारत को 14–17% अधिक लागत का सामना करना पड़ता है (कच्चे माल, लॉजिस्टिक्स आदि के कारण)
प्रमुख हस्तक्षेप 1. विश्वस्तरीय हैंड टूल क्लस्टर विकसित करना
2. बाज़ार सुधारों के माध्यम से लागत असंतुलन को दूर करना
3. प्रतिस्पर्धा बनाए रखने हेतु ब्रिज कॉस्ट सपोर्ट प्रदान करना
सरकारी फोकस हैंड और पावर टूल्स क्षेत्र को भारत की निर्माण और आर्थिक वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना गया है
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vikash

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