नीति आयोग ने भविष्य के विकास इंजन के रूप में मध्यम उद्यमों के लिए रोडमैप तैयार किया

एक महत्वपूर्ण नीतिगत पहल के तहत नीति आयोग ने “मध्यम उद्यमों के लिए नीति निर्माण” शीर्षक से एक रिपोर्ट जारी की है, जो भारत के मध्यम उद्यमों की विकास क्षमता को सशक्त रूप से उपयोग में लाने की रणनीतिक रूपरेखा प्रस्तुत करती है। माइक्रो, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र में केवल 0.3% हिस्सेदारी रखने के बावजूद, मध्यम उद्यम MSME निर्यात का लगभग 40% योगदान देते हैं, जिससे उनकी असीम संभावनाओं का संकेत मिलता है। यह रिपोर्ट वित्त, प्रौद्योगिकी, कौशल विकास, अवसंरचना और डिजिटल सहायता के क्षेत्रों में विशेष नीतिगत हस्तक्षेपों का सुझाव देती है, जिससे मध्यम उद्यमों को नवाचार, रोजगार और निर्यात-आधारित विकास के प्रमुख वाहक के रूप में सशक्त किया जा सके। यह पहल “विकसित भारत @2047” के विजन के अनुरूप भारत के औद्योगिक परिवर्तन की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

प्रसंग में क्यों?

नीति आयोग ने 26 मई 2025 को “Designing a Policy for Medium Enterprises” शीर्षक वाली रिपोर्ट जारी की, जिसमें उपाध्यक्ष श्री सुमन बेरी और सदस्य डॉ. वी.के. सारस्वत और डॉ. अरविंद विरमानी उपस्थित रहे। रिपोर्ट एमएसएमई क्षेत्र में संरचनात्मक असंतुलन को संबोधित करती है और मध्यम उद्यमों को भारत के आर्थिक परिवर्तन में एक कम उपयोग किए गए, लेकिन महत्वपूर्ण घटक के रूप में पहचानती है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

एमएसएमई क्षेत्र का योगदान:

  • भारत की GDP में 29%

  • कुल निर्यात में 40%

  • देश के 60% से अधिक कार्यबल को रोजगार

एमएसएमई के अंतर्गत वितरण:

  • सूक्ष्म (Micro): 97%

  • लघु (Small): 2.7%

  • मध्यम (Medium): केवल 0.3%, फिर भी MSME निर्यात का 40% योगदान

रिपोर्ट के उद्देश्य

  • मध्यम उद्यमों की छिपी हुई विकास क्षमता को उजागर करना

  • उन्हें भविष्य के बड़े उद्यमों के रूप में स्थापित करना

  • नवाचार, प्रतिस्पर्धा और वैश्विक स्तर पर विस्तार के लिए अनुकूल नीति वातावरण तैयार करना

प्रमुख सिफारिशें और ध्यान केंद्रित क्षेत्र

वित्तीय समाधान:

  • ₹5 करोड़ तक की क्रेडिट कार्ड सुविधा (बाजार दरों पर)

  • टर्नओवर से जुड़े कार्यशील पूंजी वित्त विकल्प

  • खुदरा बैंक वितरण प्रणाली, MSME मंत्रालय की निगरानी में

प्रौद्योगिकी और इंडस्ट्री 4.0:

  • मौजूदा प्रौद्योगिकी केंद्रों को SME 4.0 कौशल केंद्रों में परिवर्तित करना

  • उन्नत विनिर्माण और डिजिटल तकनीकों को अपनाने को बढ़ावा देना

अनुसंधान और नवाचार (R&D):

  • MSME मंत्रालय के तहत समर्पित अनुसंधान प्रकोष्ठ

  • आत्मनिर्भर भारत कोष से क्लस्टर-स्तरीय नवाचार परियोजनाओं को समर्थन

क्लस्टर-आधारित परीक्षण अवसंरचना:

  • क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार परीक्षण और प्रमाणन सुविधाओं की स्थापना

  • गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता सुनिश्चित करना

कौशल विकास:

  • क्षेत्रीय आवश्यकताओं के अनुसार कौशल प्रशिक्षण

  • उद्यमिता विकास कार्यक्रमों (ESDPs) में मध्यम उद्यम केंद्रित पाठ्यक्रम

डिजिटल पोर्टल:

  • उद्योगम पोर्टल के अंतर्गत उप-पोर्टल

  • AI आधारित सहायता, अनुपालन उपकरण और योजना खोज की सुविधा

महत्त्व

  • मध्यम उद्यम विकासशील, नवाचार-क्षम और निर्यात-केंद्रित होते हैं

  • इनकी क्षमताओं को सशक्त करने से भारत के 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने की राह तेज़ होगी

  • यह नीति बदलाव समावेशी औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम है

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vikash

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