प्रसिद्ध नाइजीरियाई फुटबॉल खिलाड़ी पीटर रूफाई का 61 वर्ष की आयु में निधन

नाइजीरिया की राष्ट्रीय फुटबॉल टीम के पूर्व गोलकीपर पीटर रूफाई का 4 जुलाई 2025, गुरुवार को 61 वर्ष की आयु में लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे नाइजीरिया की 1994 अफ्रीका कप ऑफ नेशंस (AFCON) जीत के महत्वपूर्ण सदस्य थे और उन्होंने देश का प्रतिनिधित्व करते हुए दो फीफा विश्व कप में भी हिस्सा लिया था। उनके निधन से पूरे फुटबॉल जगत में शोक की लहर दौड़ गई है और दुनिया भर से खिलाड़ी व प्रशंसक उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

फुटबॉल जगत ने खोया एक सितारा

पीटर रूफाई, जिन्हें प्यार से डोडो मयाना कहा जाता था, नाइजीरिया के फुटबॉल इतिहास के सबसे बेहतरीन गोलकीपरों में से एक थे। उन्होंने 1994 के अफ्रीका कप ऑफ नेशंस (AFCON) में नाइजीरिया की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और 1994 और 1998 के फीफा विश्व कप में टीम को प्री-क्वार्टर फाइनल (Last 16) तक पहुंचाने में मदद की।

लागोस में जन्मे रूफाई ने 1983 से 1998 के बीच नाइजीरिया के लिए कुल 65 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। 1990 के दशक को नाइजीरिया फुटबॉल का स्वर्ण युग माना जाता है, और उस दौर में उनकी शांत और भरोसेमंद उपस्थिति तथा मजबूत प्रदर्शन ने उन्हें टीम का अहम स्तंभ बना दिया था।

नाइजीरिया फुटबॉल महासंघ ने दी श्रद्धांजलि

नाइजीरिया फुटबॉल महासंघ (NFF) ने पीटर रूफाई के निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। सोशल मीडिया मंच X (पूर्व में ट्विटर) पर भावुक संदेश साझा करते हुए NFF ने लिखा:

“हम सुपर ईगल्स के दिग्गज गोलकीपर पीटर रूफाई के निधन पर शोक व्यक्त करते हैं – नाइजीरियाई फुटबॉल का एक महान सितारा और 1994 AFCON विजेता। आपका योगदान गोलपोस्ट के बीच और उसके पार हमेशा याद रखा जाएगा।”

पीटर रूफाई का निधन 1994 की ऐतिहासिक सुपर ईगल्स टीम के छठे सदस्य के रूप में हुआ है जिनका अब तक निधन हो चुका है। उनसे पहले स्टीफन केशी, राशिदी येकिनी, विलफ्रेड अगबोनवबारे, थॉम्पसन ओलिहा और उचे ओकाफोर जैसे महान खिलाड़ी भी इस दुनिया को अलविदा कह चुके हैं।

पूरा नाइजीरियाई फुटबॉल जगत आज अपने इन सितारों को याद कर रहा है, जिनकी विरासत हमेशा युवा खिलाड़ियों और देश के फुटबॉल इतिहास को प्रेरित करती रहेगी।

नाइजीरियाई फुटबॉल का एक गौरवशाली सितारा

पीटर रूफाई को सिर्फ उनकी प्रतिभा ही नहीं, बल्कि उनके नेतृत्व, खेलभावना और विनम्रता के लिए भी अत्यधिक सम्मान प्राप्त था। प्रशंसक, खिलाड़ी और उनके पूर्व साथी उन्हें गर्व और पेशेवर खेल भावना के प्रतीक के रूप में याद कर रहे हैं।

1994 में नाइजीरिया की पहली फीफा विश्व कप भागीदारी में उनके प्रदर्शन ने न सिर्फ टीम को मजबूती दी, बल्कि देश की छवि को अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल मंच पर नया आयाम दिया।

उनका निधन नाइजीरियाई फुटबॉल समुदाय ही नहीं, बल्कि पूरे अफ्रीकी और वैश्विक फुटबॉल जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति के रूप में देखा जा रहा है। उनका योगदान और प्रेरणा हमेशा खिलाड़ियों के दिलों में जीवित रहेगी।

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vikash

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