टीसीए श्रीनिवास राघवन की नई किताब इंदिरा गांधी और भारत को बदलने वाले वर्ष 1970 के दशक की भारतीय राजनीति, खास तौर पर आपातकाल के वर्षों के बारे में एक विद्वत्तापूर्ण और तटस्थ दृष्टिकोण प्रदान करती है। आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ से ठीक पहले प्रकाशित यह पुस्तक इस युग पर पुनर्विचार करती है।
आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर, टीसीए श्रीनिवास राघवन की नई पुस्तक इंदिरा गांधी और भारत को बदलने वाले वर्ष भारत के राजनीतिक इतिहास के एक अशांत और निर्णायक दौर पर एक संतुलित और विद्वत्तापूर्ण चिंतन प्रस्तुत करती है। 23 मई, 2025 को प्रकाशित यह पुस्तक इंदिरा गांधी के कार्यकाल, विशेष रूप से 1975 से 1977 तक के आपातकाल के दौरान कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका के बीच जटिल शक्ति गतिशीलता की जांच करती है।
इस पुस्तक ने आपातकाल के इर्द-गिर्द के युग की समीक्षा करते हुए अपने वस्तुनिष्ठ और अकादमिक लहजे के कारण ध्यान आकर्षित किया है, जो 26 जून, 1975 को आपातकाल लागू होने की आगामी 50वीं वर्षगांठ के साथ मेल खाता है। संवैधानिक संतुलन और नागरिक स्वतंत्रता के इर्द-गिर्द बहस के समकालीन विमर्श में नए सिरे से प्रासंगिकता हासिल करने के साथ, राघवन का विस्तृत शोध भारतीय लोकतंत्र में आधारभूत तनावों की समय पर पुनः जांच प्रदान करता है।
| सारांश/स्थैतिक | विवरण |
| चर्चा में क्यों? | आपातकाल की 50वीं वर्षगांठ से पहले नई किताब इंदिरा गांधी युग की याद दिलाती है |
| लेखक | टीसीए श्रीनिवास राघवन |
| प्रकाशक | पेंगुइन रैंडम हाउस |
| फोकस अवधि | 1969 से 1977, आपातकाल सहित (1975-77) |
| मुख्य विषय | इंदिरा गांधी के शासन में संस्थागत संघर्ष और सत्ता गतिशीलता |
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