नेपाल में हिंसक प्रदर्शन, प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने दिया इस्तीफ़ा

नेपाल 9 सितम्बर 2025 को गहरे राजनीतिक संकट में चला गया जब प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया। यह इस्तीफ़ा सरकार द्वारा लगाए गए विवादास्पद सोशल मीडिया प्रतिबंध के खिलाफ जनरेशन-ज़ेड (Gen Z) के नेतृत्व में हुए विशाल प्रदर्शनों के बाद आया। प्रतिबंध हटाने के बावजूद विरोध और तेज़ हो गया, जिसमें अब तक 20 लोगों की मौत हो चुकी है और 250 से अधिक घायल हुए हैं। बढ़ते असंतोष और हिंसा के बीच नेपाल सेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री ओली को व्यवस्था बहाल करने के लिए पद छोड़ने की सलाह दी, जिसके बाद उन्होंने इस्तीफ़ा सौंप दिया।

नेपाल में क्या हो रहा है?

सरकार द्वारा सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद युवाओं में जबरदस्त गुस्सा फैल गया।

प्रदर्शन और मांगें

  • पूरे देश में प्रदर्शन शुरू हो गए, जिनमें प्रधानमंत्री ओली के इस्तीफ़े और सरकार को बर्खास्त करने की मांग की गई।

  • प्रतिबंध हटाने के बावजूद विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गए।

इस्तीफ़े तक की प्रमुख घटनाएँ

  • 8 सितम्बर 2025: प्रदर्शन हिंसक हुए; 20 लोगों की मौत और 250 से अधिक घायल।

  • 9 सितम्बर 2025: ओली ने शांति की अपील की और सर्वदलीय बैठक बुलाने की घोषणा की।

  • सेना का दबाव: नेपाल सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिग्देल ने ओली को इस्तीफ़े की सलाह दी और स्पष्ट किया कि राजनीतिक समाधान के बिना सैन्य कार्रवाई संभव नहीं।

  • इस्तीफ़ा: ओली ने पद छोड़ते हुए कहा कि वे “राजनीतिक समाधान को आसान बनाने” के लिए हट रहे हैं।

हिंसा का बढ़ना

  • सरकारी दफ़्तर खाली कराए गए: मंत्रियों को भैसेपाटी आवासीय परिसर से हेलिकॉप्टर द्वारा त्रिभुवन अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे ले जाया गया।

  • हवाई अड्डा बंद: प्रदर्शनकारियों द्वारा ड्रोन, पटाखों और लेज़र लाइट से हमले की धमकियों के चलते सभी उड़ानें रद्द कर दी गईं।

  • संसद में आगजनी: प्रदर्शनकारियों ने नेपाल की संसद को आग के हवाले कर दिया और प्रधानमंत्री व राष्ट्रपति सहित शीर्ष नेताओं के घरों में तोड़फोड़ की।

  • सिंहदरबार पर हमला: महत्वपूर्ण मंत्रालयों और आवासीय दफ़्तरों पर धावा बोला गया।

संभावित परिणाम

  • सूत्रों का कहना है कि ओली दुबई में शरण ले सकते हैं।

  • नेपाल गंभीर राजनीतिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है और अशांति पर काबू पाना सरकार के लिए चुनौती बन गया है।

  • नई राजनीतिक व्यवस्था बनने तक शासन स्थिर करने में सेना अहम भूमिका निभा सकती है।

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vikash

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