भारत ने 11 मई 2025 को राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस मनाया, जो पोखरण में 1998 में किए गए ऐतिहासिक परमाणु परीक्षणों की स्मृति में मनाया जाता है, साथ ही यह दिन विज्ञान और प्रौद्योगिकी में देश की बढ़ती ताकत को भी मान्यता देता है। इस वर्ष का विषय है – “नवाचार के माध्यम से टिकाऊ भविष्य को सशक्त बनाना”, जो पर्यावरण-अनुकूल, स्वदेशी और अभिनव तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करने पर केंद्रित है।
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2025 इस कारण चर्चा में है क्योंकि भारत ने पोखरण-II परमाणु परीक्षणों की 27वीं वर्षगांठ मनाई। 2025 का विषय नवाचार के माध्यम से सतत विकास पर केंद्रित है, जो यह दर्शाता है कि भारत जिम्मेदार तकनीकी प्रगति में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में अग्रसर है।
आयोजन तिथि: प्रतिवर्ष 11 मई
स्थापना: 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा घोषित
ऐतिहासिक घटना: 11 और 13 मई 1998 को डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के नेतृत्व में पोखरण-II परमाणु परीक्षण
ऑपरेशन का नाम: ऑपरेशन शक्ति
पोखरण में तीन परमाणु परीक्षण सफलतापूर्वक किए गए
भारत का स्वदेशी हल्का विमान हंसा-3 का बेंगलुरु में परीक्षण
डीआरडीओ द्वारा त्रिशूल मिसाइल का सफल परीक्षण
“नवाचार के माध्यम से टिकाऊ भविष्य को सशक्त बनाना”
मुख्य बिंदु:
पर्यावरण-अनुकूल नवाचारों को बढ़ावा देना
स्वदेशी तकनीकों को सशक्त करना
युवाओं को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में करियर के लिए प्रेरित करना
सार्वजनिक-निजी भागीदारी से टिकाऊ तकनीकी समाधान विकसित करना
वैज्ञानिक समुदाय और उनके योगदान को सम्मान देना
भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और रक्षा क्षमताओं को उजागर करना
रक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे क्षेत्रों में नवाचार को प्रोत्साहित करना
नीति निर्माताओं को अनुसंधान एवं विकास (R&D) और हरित तकनीक में निवेश के लिए प्रेरित करना
“प्रौद्योगिकी दूरियाँ मिटा सकती है, दिलों को जोड़ सकती है, और एक बेहतर दुनिया बना सकती है।”
“प्रत्येक तकनीकी खोज मानव विकास की दिशा में एक कदम है।”
| सारांश / स्थैतिक जानकारी | विवरण |
| समाचार में क्यों? | राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2025: भारत की वैज्ञानिक और रणनीतिक उपलब्धियों का उत्सव |
| घटना | राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी दिवस 2025 |
| विषय | “नवाचार के माध्यम से टिकाऊ भविष्य को सशक्त बनाना” |
| स्मरण किए गए प्रमुख घटनाक्रम | पोखरण-II परमाणु परीक्षण, हंसा-3 विमान की उड़ान, त्रिशूल मिसाइल परीक्षण |
| पहली बार मनाया गया | 1999 |
| नेतृत्व | डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम |
| महत्त्व | भारत की वैज्ञानिक प्रगति और रणनीतिक क्षमताओं का उत्सव |
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