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बीसीसीआई भी होगा राष्ट्रीय खेल शासन विधेयक का हिस्सा

राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक, 2025 भारत के खेल प्रशासन में व्यापक बदलाव की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। इस विधेयक की प्रमुख विशेषताओं में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) को सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे में लाना और उसे औपचारिक रूप से एक राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के रूप में मान्यता देना शामिल है। यह विधेयक सभी राष्ट्रीय खेल महासंघों में संरचनात्मक सुधार, अधिक पारदर्शिता और विवाद निवारण के लिए समुचित तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव रखता है।

पृष्ठभूमि:

भारत में खेल प्रशासन में सुधार की मांग कई वर्षों से जारी है। वर्ष 2010 में राष्ट्रीय खेल महासंघों (NSFs) को सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत “सार्वजनिक प्राधिकरण” घोषित किया गया था, लेकिन भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने अपनी स्वायत्तता और सरकारी वित्त पोषण न मिलने का हवाला देते हुए इस दायरे से स्वयं को बाहर रखा। हालांकि, 2028 ओलंपिक में टी20 क्रिकेट के शामिल होने और भारत की 2036 ओलंपिक की मेज़बानी की आकांक्षा ने खेल संगठनों को अंतरराष्ट्रीय मानकों और जवाबदेही की दिशा में लाने को अनिवार्य बना दिया है।

महत्व:

यह विधेयक खेल प्रशासन में एक अहम बदलाव का संकेत देता है, जिसका उद्देश्य विशेष रूप से BCCI जैसे प्रभावशाली और समृद्ध निकायों में प्रशासनिक अपारदर्शिता को समाप्त करना है। BCCI को RTI अधिनियम के तहत लाकर सरकार उसकी कार्यप्रणाली में सार्वजनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करना चाहती है। यह कदम इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि BCCI भले ही सरकारी अनुदान न लेता हो, लेकिन वह राष्ट्रीय क्रिकेट टीमों के चयन और विशाल धनराशि के प्रबंधन जैसी केंद्रीय भूमिका निभाता है।

उद्देश्य:

  • सभी खेल महासंघों को एकीकृत ढांचे के अंतर्गत कानूनी मान्यता प्रदान करना।

  • जवाबदेही बढ़ाने और कानूनी विवादों को कम करने हेतु संस्थागत सुधार लागू करना।

  • विवादों के समयबद्ध समाधान के लिए एक राष्ट्रीय खेल अधिकरण (National Sports Tribunal) की स्थापना।

  • खेल प्रशासन को ओलंपिक चार्टर के सिद्धांतों के अनुरूप बनाना।

  • बेहतर प्रशासन के माध्यम से भारत की 2036 ओलंपिक मेज़बानी की दावेदारी को सशक्त बनाना।

मुख्य विशेषताएं:

  • BCCI को राष्ट्रीय खेल महासंघ (NSF) के रूप में मान्यता दी जाएगी और इसे RTI अधिनियम के अंतर्गत लाया जाएगा।

  • खेल अधिकारियों की अधिकतम आयु सीमा 75 वर्ष तक बढ़ाई गई है, जिससे वर्तमान प्रशासकों को लाभ मिलेगा।

  • एक राष्ट्रीय खेल बोर्ड (National Sports Board – NSB) का गठन किया जाएगा, जो नियामक और निगरानी की शक्तियों से युक्त होगा।

  • सभी खेल संघों की संचालन समितियों में खिलाड़ियों के प्रतिनिधियों, महिलाओं और प्रतिष्ठित खिलाड़ियों की अनिवार्य भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

  • राष्ट्रीय खेल अधिकरण (National Sports Tribunal) का गठन किया जाएगा, जिसकी अपील सर्वोच्च न्यायालय में की जा सकेगी।

  • चुनावों की निगरानी एक राष्ट्रीय खेल चुनाव समिति (National Sports Election Panel) द्वारा की जाएगी, जिसमें वरिष्ठ सेवानिवृत्त चुनाव अधिकारी शामिल होंगे।

  • शीर्ष पदाधिकारियों के लिए अधिकतम तीन कार्यकाल और 15 सदस्यीय कार्यकारिणी की सीमा तय की गई है, साथ ही कार्यकालों के बीच ‘कूलिंग ऑफ पीरियड’ भी अनिवार्य होगा।

प्रभाव:

इस विधेयक के लागू होने से खेल महासंघों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। BCCI के लिए यह सार्वजनिक जवाबदेही मानकों के अनुरूप एक संरचनात्मक बदलाव होगा। विधेयक का उद्देश्य खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ाना, लैंगिक संतुलन स्थापित करना और प्रशासनिक मानकों को सशक्त बनाना है, जिससे वैश्विक खेल मंच पर भारत की छवि और साख को मजबूती मिलेगी।

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vikash

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