राष्ट्रीय लघु उद्योग दिवस 2025 पूरे भारत में 30 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन का उद्देश्य लघु उद्योगों (SSIs) के योगदान को पहचानना और प्रोत्साहित करना है, जो भारत की आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और नवाचार को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह दिवस वर्ष 2001 से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है।
इस दिवस की शुरुआत वर्ष 2000 में सरकार द्वारा घोषित एक नीतिगत पैकेज से हुई थी, जिसका उद्देश्य था:
लघु उद्योगों के भुगतान में देरी की समस्या का समाधान करना।
अवसंरचना और प्रौद्योगिकी तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित करना।
लघु उद्योगों के लिए सहयोगी पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करना।
30 अगस्त 2001 को इसे पहली बार मनाया गया।
2007 में संबंधित मंत्रालयों के विलय से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय (MSME) का गठन हुआ, जिसने इस क्षेत्र को और अधिक संस्थागत सहयोग प्रदान किया।
लघु उद्योगों को भारत के औद्योगिक क्षेत्र की रीढ़ माना जाता है। इनके महत्व के मुख्य बिंदु हैं:
आर्थिक योगदान – जीडीपी और निर्यात में बड़ा हिस्सा, जो आर्थिक स्थिरता को मजबूती देता है।
रोजगार सृजन – ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लाखों नौकरियाँ उपलब्ध कराना।
समावेशी विकास – क्षेत्रीय असमानताओं को कम कर संतुलित औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देना।
सांस्कृतिक संरक्षण – परंपरागत शिल्प और कौशल को बनाए रखना।
उद्यमिता और नवाचार – जमीनी स्तर पर नए उद्यमों और आधुनिक तकनीक अपनाने को प्रोत्साहित करना।
इस वर्ष के आयोजन का मुख्य फोकस निम्नलिखित लक्ष्यों पर है:
लघु उद्योगों का प्रोत्साहन – इन्हें आर्थिक पारिस्थितिकी तंत्र के अहम हिस्से के रूप में बढ़ावा देना।
रोजगार सृजन – युवाओं के लिए नए व्यवसायों के जरिए अवसर उपलब्ध कराना।
संतुलित आर्थिक विकास – ग्रामीण और शहरी औद्योगिकीकरण के बीच की खाई को पाटना।
उद्यमियों का सम्मान – कारीगरों और छोटे उद्यमियों को नवाचार और सांस्कृतिक संरक्षण हेतु सम्मानित करना।
नीतिगत जागरूकता – सरकार की योजनाओं जैसे क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE), क्लस्टर डेवलपमेंट प्रोग्राम और डिजिटल पहल का प्रचार।
समावेशी विकास – ग्रामीण और वंचित समुदायों की औद्योगिक वृद्धि में भागीदारी सुनिश्चित करना।
कौशल विकास और नवाचार – प्रशिक्षण, उन्नयन और आधुनिक तकनीक अपनाने को बढ़ावा देना।
इस अवसर पर एमएसएमई मंत्रालय, उद्योग संघों और राज्य सरकारों द्वारा कई कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जैसे:
उत्कृष्ट लघु उद्यमियों को सम्मानित करने हेतु पुरस्कार समारोह।
कार्यशालाएँ और प्रशिक्षण कार्यक्रम – कौशल विकास, प्रौद्योगिकी अपनाने और नवाचार पर।
नीतिगत जागरूकता अभियान – सरकारी योजनाओं और वित्तीय सहयोग के बारे में।
प्रदर्शनियाँ और मेले – ग्रामीण और शहरी लघु उद्योगों के उत्पादों का प्रदर्शन।
नेटवर्किंग कार्यक्रम – उद्यमियों को निवेशकों, मार्गदर्शकों और नीतिनिर्माताओं से जोड़ना।
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