धरती की ओर बढ़ रहा NASA का 600 किलो का सैटेलाइट, जानें सबकुछ

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा (NASA) का एक पुराना सैटेलाइट अब पृथ्वी की ओर लौट रहा है। करीब 600 किलोग्राम वजनी वैन एलन प्रोब ए (Van Allen Probe A) कई साल तक अंतरिक्ष में काम करने के बाद अब वायुमंडल में प्रवेश करेगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका ज्यादातर हिस्सा जल जाएगा। इसलिए आम लोगों के लिए खतरा बहुत कम माना जा रहा है। इसे अगस्त 2012 में अपने ट्विन, वैन एलन प्रोब B के साथ धरती के चारों ओर रेडिएशन बेल्ट की स्टडी करने के लिए लॉन्च किया गया था। इस सैटेलाइट का नाम वैन एलन प्रोब A है। ये दोनों स्पेसक्राफ्ट 2019 में डीएक्टिवेट हो गए थे और वैन एलन प्रोब A का धरती से बाहर का समय अब लगभग खत्म हो गया है।

नासा का सैटेलाइट कब और कहां गिरेगा?

नासा के अधिकारियों ने 09 मार्च 2026 को एक अपडेट में बताया है कि “NASA को उम्मीद है कि वायुमंडल से गुजरते समय सैटेलाइट का ज्यादातर हिस्सा जल जाएगा लेकिन कुछ पार्ट्स के वापस आने पर बच जाने की उम्मीद है। हालांकि धरती पर किसी को भी नुकसान होने का रिस्क अत्यंत कम है, शायद 4,200 में से 1।” नासा ने बताया है कि चोट लगने का यह कम रिस्क, करीब 0.02% है। क्योंकि धरती की सतह का लगभग 70% हिस्सा पानी से ढका हुआ है। इसलिए जो भी पार्ट्स वापस आने पर बचेंगे वे शायद खुले समुद्र में गिरेंगे। किसी शहर में या उसके आस-पास नहीं गिरने की संभावना नहीं है। नासा ने कहा है कि अभी यह तय नहीं है कि यह ठीक किस जगह गिरेगा क्योंकि तेज रफ्तार की वजह से इसकी सटीक लोकेशन बताना मुश्किल होता है। लेकिन नासा के अधिकारी सैटेलाइट पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

उपग्रह का पुनः प्रवेश और प्रमुख विवरण

वैन एलन प्रोब ए का वजन लगभग 1,323 पाउंड (लगभग 600 किलोग्राम) है। संयुक्त राज्य अमेरिका अंतरिक्ष बल के ट्रैकिंग डेटा के अनुसार यह उपग्रह लगभग 7:45 बजे (EDT) के आसपास वायुमंडल में प्रवेश कर सकता है।

चूंकि यह उपग्रह अब सक्रिय नहीं है, इसलिए इसके पृथ्वी पर लौटने की प्रक्रिया को नियंत्रित नहीं किया जा सकता। वायुमंडल में प्रवेश के दौरान घर्षण के कारण अत्यधिक गर्मी उत्पन्न होगी, जिससे उपग्रह का अधिकांश ढांचा टूटकर जल जाएगा और आकाश में एक चमकदार अग्निमय लकीर दिखाई दे सकती है।

मलबे से खतरा क्यों बहुत कम है

वैज्ञानिकों का कहना है कि वैन एलन प्रोब ए के मलबे से खतरा बेहद कम है। वायुमंडल में प्रवेश के समय उत्पन्न अत्यधिक गर्मी के कारण उपग्रह का अधिकांश हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो जाएगा।

यदि कुछ छोटे टुकड़े बच भी जाते हैं, तो उनके आबादी वाले क्षेत्रों में गिरने की संभावना बहुत कम है। इसका मुख्य कारण यह है कि पृथ्वी की लगभग 71% सतह महासागरों से ढकी हुई है, इसलिए गिरने वाला अधिकांश मलबा समुद्र में ही गिरता है।

उपग्रह के पुनः प्रवेश की भविष्यवाणी करना क्यों कठिन है

किसी उपग्रह के पुनः प्रवेश का सटीक समय और स्थान निर्धारित करना वैज्ञानिकों के लिए चुनौतीपूर्ण होता है।

इस पर कई कारक प्रभाव डालते हैं, जैसे—

  • वायुमंडल की घनत्व में बदलाव
  • सौर गतिविधि
  • अंतरिक्ष मौसम
  • उपग्रह की कक्षा की स्थिति

इन्हीं कारणों से वैन एलन प्रोब ए के पुनः प्रवेश के समय में लगभग ±24 घंटे की अनिश्चितता मानी जा रही है।

वैन एलन प्रोब मिशन और वैज्ञानिक उद्देश्य

यह मिशन 30 अगस्त 2012 को लॉन्च किया गया था। इसमें दो समान अंतरिक्ष यान शामिल थे—

  • वैन एलन प्रोब ए
  • वैन एलन प्रोब बी

इस मिशन का मुख्य उद्देश्य Van Allen Radiation Belts का अध्ययन करना था। ये पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में फंसे उच्च ऊर्जा वाले आवेशित कणों के क्षेत्र होते हैं।

ये विकिरण पट्टियां पृथ्वी के चारों ओर डोनट (doughnut) के आकार की संरचना बनाती हैं और अंतरिक्ष मौसम को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

अंतरिक्ष मलबा और उपग्रहों का पृथ्वी पर लौटना

वैन एलन प्रोब ए का पुनः प्रवेश अंतरिक्ष मलबे (Space Debris) की एक सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। पृथ्वी की कक्षा में हजारों उपग्रह, रॉकेट चरण और अन्य अवशेष मौजूद हैं, जिनमें से कई मिशन समाप्त होने के बाद धीरे-धीरे पृथ्वी के वायुमंडल में लौट आते हैं।

अंतरिक्ष एजेंसियों के अनुसार छोटे अंतरिक्ष मलबे के टुकड़े लगभग रोजाना पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं। इनमें से अधिकांश सतह तक पहुंचने से पहले ही जलकर नष्ट हो जाते हैं, इसलिए ऐसे घटनाक्रम आमतौर पर लोगों के लिए खतरा नहीं बनते।

वैन एलन विकिरण बेल्ट

वैन एलन विकिरण पट्टियां पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में फंसे उच्च ऊर्जा वाले आवेशित कणों के क्षेत्र हैं। इनकी खोज 1958 में अमेरिकी भौतिक विज्ञानी जेम्स वैन एलन ने शुरुआती अंतरिक्ष मिशनों के दौरान की थी।

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vikash

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