नासा के ग्रेल मिशन ने चंद्रमा की विषमता के रहस्य को सुलझाया

एक बड़ी सफलता में, GRAIL (ग्रेविटी रिकवरी एंड इंटीरियर लेबोरेटरी) मिशन के डेटा पर आधारित एक नए नासा अध्ययन ने आखिरकार दशकों पुराने रहस्य को सुलझा दिया है कि चंद्रमा का निकटवर्ती भाग उसके दूरवर्ती भाग से नाटकीय रूप से अलग क्यों दिखता है। निष्कर्ष चंद्रमा की आंतरिक संरचना, ज्वालामुखी इतिहास और तापीय विकास के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं।

क्यों है चर्चा में?

NASA के वैज्ञानिकों ने GRAIL (Gravity Recovery and Interior Laboratory) मिशन के आंकड़ों के आधार पर यह स्पष्ट किया है कि चंद्रमा के दो हिस्सों – नज़दीकी (nearside) और दूरवर्ती (farside) – की भिन्नता का कारण पृथ्वी का गुरुत्वीय प्रभाव और चंद्रमा के आंतरिक ताप स्रोत हैं।
यह अध्ययन चंद्रमा की आंतरिक संरचना, ज्वालामुखीय इतिहास, और थर्मल विकास को समझने में महत्वपूर्ण है।

GRAIL मिशन के बारे में

  • पूरा नाम: Gravity Recovery and Interior Laboratory

  • लॉन्च: NASA द्वारा 2011 में केप कैनावेरल से Delta II रॉकेट द्वारा

  • प्रबंधन: Jet Propulsion Laboratory (JPL); वैज्ञानिक नेतृत्व: MIT

  • यंत्र: दो यान — Ebb और Flow, एक साथ उड़ान भरते थे

  • उद्देश्य: चंद्रमा के गुरुत्वीय क्षेत्र का अत्यधिक सटीक मानचित्रण

मुख्य उद्देश्य और खोजें

गुरुत्वीय क्षेत्र का मानचित्रण

  • चंद्रमा के गुरुत्व में सूक्ष्म परिवर्तन दर्ज कर उसकी आंतरिक संरचना का अनुमान लगाया गया।

भूपर्पटी में अंतर

  • नज़दीकी भाग: पर्पटी पतली है; इससे लावा का प्रवाह संभव हुआ और बेसाल्टिक मैदान (mare) बने।

  • दूरवर्ती भाग: पर्पटी मोटी है; सतह अधिक खुरदरी और गड्ढों (क्रेटर) से युक्त, क्योंकि यहां ज्वालामुखीय गतिविधि कम थी।

ऊष्मा प्रवाह और रेडियोधर्मी तत्व

  • नज़दीकी भाग में थोरियम और टाइटेनियम की मात्रा अधिक।

  • इसके मेंटल (आंतरिक परत) का तापमान दूरवर्ती भाग से लगभग 200°C अधिक पाया गया।

ज्वारीय प्रभाव

  • नज़दीकी भाग पर पृथ्वी के गुरुत्वीय आकर्षण से अधिक ज्वारीय खिंचाव (tidal flexing) होता है।

  • इससे चंद्रमा के दोनों गोलार्धों के बीच आंतरिक असमानता की पुष्टि होती है।

महत्त्व

  • दशकों पुराने चंद्र भूवैज्ञानिक रहस्य का समाधान

  • ग्रहों की संरचना और विकास को बेहतर समझने में मदद

  • भविष्य के चंद्र अभियानों और उतरने के स्थलों के चयन में सहायक सिद्ध होगा

सारांश/स्थिर जानकारी विवरण
क्यों चर्चा में? NASA का GRAIL मिशन चंद्रमा की विषमता (Asymmetry) का रहस्य सुलझाता है
मिशन का नाम GRAIL (Gravity Recovery and Interior Laboratory)
लॉन्च वर्ष 2011 में NASA द्वारा Delta II रॉकेट से लॉन्च
प्रबंधन NASA का JPL, MIT के सहयोग से
मुख्य यान Ebb और Flow (दो उपग्रह जो एक साथ कार्यरत थे)
मुख्य उद्देश्य चंद्रमा का गुरुत्वीय मानचित्र बनाना और आंतरिक संरचना का अध्ययन करना
प्रमुख खोज गुरुत्वीय और तापीय भिन्नताओं के कारण चंद्रमा की असमानता का खुलासा
वैज्ञानिक प्रभाव नज़दीकी और दूरवर्ती पक्ष की भिन्नता के रहस्य को सुलझाया गया
मिशन की स्थिति सफलतापूर्वक पूरा हुआ; चंद्रमा की सतह पर नियंत्रित टक्कर के साथ समाप्त
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

AI की नई छलांग: Microsoft का MAI-Transcribe-1 तेज, सटीक और किफायती

AI के क्षेत्र में एक बड़ी सफलता के तौर पर, Microsoft ने 'MAI-Transcribe-1' नाम का…

1 day ago

आउटर स्पेस ट्रीटी 1967 क्या है? सिद्धांत, सदस्य और महत्व

बाह्य अंतरिक्ष संधि (Outer Space Treaty) अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून की नींव है, जिस पर वर्ष…

1 day ago

भारतीय नौसेना INS अरिदमन: विशेषताएँ, भूमिका और रणनीतिक महत्व की व्याख्या

भारतीय नौसेना ने अपनी तीसरी परमाणु-संचालित बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी, INS अरिदमन को अपने बेड़े में…

1 day ago

Raja Ravi Varma की पेंटिंग ने रचा इतिहास, बनी भारत की सबसे महंगी कलाकृति

भारतीय कला के इतिहास में एक नया अध्याय जुड़ गया है, क्योंकि राजा रवि वर्मा…

1 day ago

भारत डोपिंग मामलों में सबसे ऊपर, एआईयू की सूची में केन्या को पीछे छोड़ा

एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट के अनुसार, कुछ चिंताजनक संकेत सामने आ रहे हैं, जिनके मुताबिक भारत…

1 day ago

पहले ‘खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026’ का समापन: कर्नाटक विजयी रहा

खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 (KITG) का पहला संस्करण 4 अप्रैल, 2026 को संपन्न हुआ।…

1 day ago