भारत की स्वास्थ्य सेवा गुणवत्ता ढाँचे को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए नेशनल एक्रेडिटेशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एंड कैलिब्रेशन लेबोरेटरीज़ (NABL) ने आईएसओ 15189:2022 मानक के तहत आवेदन करने वाली प्रयोगशालाओं के लिए नया मेडिकल एप्लीकेशन पोर्टल लॉन्च किया है। यह डिजिटल पहल 19 अगस्त 2025 को आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम “गोइंग लाइव” के दौरान पेश की गई। इसका उद्देश्य प्रयोगशाला मान्यता (accreditation) प्रक्रिया में पारदर्शिता, दक्षता और सहजता लाना है।
आईएसओ 15189:2022 एक अंतरराष्ट्रीय मानक है जो चिकित्सा प्रयोगशालाओं के लिए गुणवत्ता और क्षमता संबंधी आवश्यकताओं को परिभाषित करता है। इस मानक के तहत मान्यता प्राप्त करने से यह सुनिश्चित होता है कि प्रयोगशालाएँ निदान परीक्षणों में सटीकता, विश्वसनीयता और सुरक्षा के साथ कार्य कर रही हैं। यह भारत की स्वास्थ्य सेवा प्रणाली की मजबूती के लिए अत्यंत आवश्यक है।
एनएबीएल द्वारा इस आवेदन प्रक्रिया का डिजिटलीकरण करने से भारत के स्वास्थ्य ढाँचे को कई लाभ होंगे—जैसे तेज़ मंजूरी, मानव-त्रुटियों में कमी और बेहतर अनुपालन।
नया एनएबीएल मेडिकल एप्लीकेशन पोर्टल चिकित्सा प्रयोगशालाओं के वास्तविक कार्यप्रवाह को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसकी मुख्य विशेषताएँ हैं:
पुनर्गठित आवेदन प्रक्रिया, जिससे फॉर्म भरना और स्थिति (status) ट्रैक करना आसान होगा।
मानकीकृत दस्तावेज़ टेम्पलेट्स, जो भ्रम और त्रुटियों को कम करेंगे।
विस्तृत प्री-रजिस्ट्रेशन चेकलिस्ट, जिससे प्रयोगशालाएँ आवेदन से पहले अपनी तैयारी सुनिश्चित कर सकें।
सरल और उपयोगकर्ता-अनुकूल इंटरफ़ेस, जिसमें स्पष्ट नेविगेशन होगा।
मल्टी-यूज़र एक्सेस सुविधा, जिससे लैब मैनेजर, क्वालिटी हेड जैसे अलग-अलग जिम्मेदार व्यक्ति सुरक्षित रूप से लॉगिन कर अपने कार्य पूरे कर सकेंगे।
क्यूसीआई (QCI) के चेयरपर्सन श्री जक्सय शाह के अनुसार, जिन नियमित गतिविधियों में पहले हफ़्तों या महीनों का समय लगता था, उन्हें अब मात्र 2–3 घंटे में पूरा किया जा सकेगा।
इस पोर्टल के लॉन्च से कई ठोस लाभ होंगे:
तेज़ी: आवेदन प्रक्रिया का शीघ्र निपटारा, जिससे मान्यता चक्र कम समय में पूरा होगा।
पारदर्शिता: हर चरण की रीयल-टाइम जानकारी प्रयोगशालाओं तक पहुँचेगी।
जवाबदेही: मल्टी-यूज़र एक्सेस के ज़रिए आंतरिक जाँच और दस्तावेज़ सत्यापन आसान होगा।
लागत प्रभावशीलता: डिजिटल प्रोसेसिंग से प्रशासनिक और लॉजिस्टिक खर्च घटेंगे।
राष्ट्रीय पहुँच: भारत के किसी भी हिस्से से लैब बिना क्षेत्रीय कार्यालयों पर निर्भर हुए सिस्टम का उपयोग कर पाएँगी।
आख़िरकार, इससे देश में मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं की संख्या बढ़ेगी, निदान की विश्वसनीयता में सुधार होगा और मरीज़ों के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सामने आएँगे।
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