MoSPI ने भुवन प्लेटफॉर्म का उपयोग करके शहरी फ़्रेम सर्वेक्षण पर इसरो के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई) के तहत राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) (फील्ड कार्य प्रभाग-एफओडी) ने शहरी फ्रेम सर्वेक्षण (यूएफएस) की सुविधा के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अंतर्गत राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) किया है।

समझौता ज्ञापन के अंतर्गत डिजिटल मोड में भुवन प्लेटफ़ॉर्म का उपयोग करके अत्याधुनिक जियो आईसीटी टूल और तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। समझौता ज्ञापन पर सुभाष चंद्र मलिक, अपर महानिदेशक, एनएसएसओ, एमओएसपीआई और डॉ. श्रीनिवास राव एस, उप निदेशक, बीजीडब्ल्यूएसए, एनआरएससी ने हस्ताक्षर किये।

 

सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण

शहरी फ्रेम सर्वेक्षण शहरी भौगोलिक इकाइयों का ढांचा तैयार करता है और उसके रखरखाव का कार्य करता है। यह कार्य पांच साल की अवधि में विभिन्न चरणों में किया जाता है, यह मुख्य रूप से एनएसएसओ के बड़े पैमाने पर सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के लिए शहरी क्षेत्रों के वास्ते नमूने तैयार करता है। यूएफएस ने पहली बार डिजिटल रूप से चरण 2017-22 के दौरान भुवन प्लेटफॉर्म का उपयोग करके 5300 से अधिक शहरों को कवर किया था। वर्तमान चरण (2022-2027) में, भुवन प्लेटफॉर्म पर निर्मित मोबाइल, डेस्कटॉप और वेब आधारित भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) समाधानों के बेहतर संस्करणों के साथ लगभग 8134 शहरों के सर्वेक्षण कार्यों की योजना बनाई गई है।

 

समझौता ज्ञापन के तहत राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर

समझौता ज्ञापन में राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) शहरी फ्रेम सर्वेक्षण डेटा की जियो-टैगिंग के लिए मोबाइल एप्लिकेशन का विकास/सुधार, देखरेख के लिए वेब पोर्टल, सिस्टम जनित जांच, मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से सबमिट किए गए डेटा की विज़ुअलाइज़ेशन, उच्च रिज़ॉल्यूशन सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग करके यूएफएस के ब्लॉक, IV-यूनिट, वार्ड और शहर की सीमाओं का निर्धारण किया गया है। समझौता ज्ञापन के तहत राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) एनएसएसओ के अधिकारियों की क्षमता निर्माण के लिए यह सुविधाएं उपलब्ध कराएगा।

 

इस सहयोग का उद्देश्य

इस सहयोग का उद्देश्य शहरी फ्रेम सर्वेक्षण (यूएफएस) में परिवर्तन लाना है और एनलॉग से लेकर डिजिटल मोड में बदलना है। इससे सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय को शहरी फ्रेम को नियमित रूप से समय पर अपडेट करने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

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vikash

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