सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने पहली वन-केंद्रित पर्यावरण लेखा रिपोर्ट जारी की

भारत सरकार ने फॉरेस्ट अकाउंट्स 2025 (वन लेखे 2025) जारी किए हैं, जिनमें खंड-I: राष्ट्रीय स्तर के वन लेखे और खंड-II: राज्य स्तरीय प्रवृत्तियाँ और साहित्य समीक्षा शामिल हैं। यह रिपोर्ट पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली (SEEA) ढाँचे पर आधारित है और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं के अनुरूप भारत के वनों की भौतिक, मौद्रिक और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं का आकलन प्रस्तुत करती है। एक दशक से अधिक के आँकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट वन संरक्षण, जलवायु परिवर्तन शमन और वन सेवाओं के आर्थिक मूल्यांकन में भारत की प्रगति को रेखांकित करती है तथा 2070 तक नेट-जीरो लक्ष्य की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

रिपोर्ट की प्रमुख बातें

1. वन आवरण और भौतिक संपत्ति लेखा

  • 2010–11 से 2021–22 के बीच भारत का वन आवरण 17,444.61 वर्ग किमी (22.5%) बढ़ा।

  • अब कुल वन क्षेत्र 7.15 लाख वर्ग किमी हो गया है, जो भारत के कुल भौगोलिक क्षेत्र का 21.76% है।

  • राज्यवार वृद्धि:

    • केरल: +4,137 वर्ग किमी

    • कर्नाटक: +3,122 वर्ग किमी

    • तमिलनाडु: +2,606 वर्ग किमी

2. विस्तार लेखा: वन क्षेत्र समायोजन

  • 2013 से 2023 के बीच भारत में वन क्षेत्र का शुद्ध वृद्धि 3,356 वर्ग किमी दर्ज की गई।

  • यह वृद्धि मुख्य रूप से पुनर्वर्गीकरण और सीमा संशोधन के कारण हुई।

  • उल्लेखनीय राज्य:

    • उत्तराखंड: +6.3%

    • ओडिशा: +1.97%

    • झारखंड: +1.9%

3. स्थिति लेखा: वन स्टॉक में वृद्धि

  • 2013 से 2023 के बीच 305.53 मिलियन घन मीटर (7.32%) की वृद्धि।

  • प्रमुख योगदानकर्ता:

    • मध्य प्रदेश: 136 मिलियन घन मीटर

    • छत्तीसगढ़: 51 मिलियन घन मीटर

    • तेलंगाना: 28 मिलियन घन मीटर

    • अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह: 77 मिलियन घन मीटर

4. राज्य स्तरीय प्रवृत्तियाँ और शोध (खंड-II)

  • राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के स्तर पर दशकीय आँकड़े प्रस्तुत।

  • विषय: वन संपत्ति में बदलाव, पारिस्थितिकी तंत्र की स्थिति, प्रावधान व नियामक सेवाएँ।

  • साहित्य समीक्षा और मूल्यांकन मॉडल भी शामिल, ताकि राज्य GDP में वनों का एकीकरण किया जा सके।

5. सेवाओं का लेखा: वन योगदान का मूल्यांकन

प्रावधान सेवाएँ (Provisioning Services)

  • लकड़ी, औषधीय पौधे, फल, बांस आदि का मूल्य:

    • 2011–12: ₹30,720 करोड़

    • 2021–22: ₹37,930 करोड़ (भारत के GDP का 0.16%)

  • शीर्ष राज्य:

    • महाराष्ट्र: ₹23,780 करोड़

    • गुजरात: ₹14,150 करोड़

    • केरल: ₹8,550 करोड़

नियामक सेवाएँ (Regulating Services – Carbon Retention)

  • 2015–16: ₹409,100 करोड़

  • 2021–22: ₹620,970 करोड़ (GDP का 2.63%)

  • शीर्ष राज्य:

    • अरुणाचल प्रदेश: ₹296,000 करोड़

    • उत्तराखंड: ₹156,600 करोड़

    • असम: ₹129,960 करोड़

6. आँकड़े और पद्धति

  • स्रोत:

    • इंडिया स्टेट ऑफ फॉरेस्ट रिपोर्ट (ISFR)

    • फॉरेस्ट्री स्टैटिस्टिक्स 2021 (ICFRE)

    • राष्ट्रीय लेखा आँकड़े

    • SEEA मानक

    • NCAVES परियोजना

  • QR कोड आधारित डेटासेट भी उपलब्ध कराए गए हैं।

स्थिर तथ्य (Static)

  • जारी किया गया: MoSPI द्वारा CoCSSO, 25 सितम्बर 2025

  • ढाँचा: UN SEEA (पर्यावरण-आर्थिक लेखांकन प्रणाली)

  • वन आवरण वृद्धि: +17,444.61 वर्ग किमी (2010–11 से 2021–22)

  • कार्बन अवशोषण मूल्य: ₹620,970 करोड़ (GDP का 2.63%, 2021–22)

  • ग्रोइंग स्टॉक वृद्धि: +305.53 मिलियन घन मीटर (2013–2023)

  • प्रावधान सेवाएँ मूल्य (2021–22): ₹37,930 करोड़

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vikash

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