प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इजरायल और फलस्तीन दोनों से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करने वाले विश्व के चुनिंदा नेताओं में शामिल हो गए हैं। इजरायली संसद (केसेट) में अपने ऐतिहासिक संबोधन के बाद उन्हें ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। यह केसेट का सर्वोच्च सम्मान है और पीएम मोदी इस पदक को प्राप्त करने वाले पहले नेता बने हैं।
केसेट स्पीकर अमीर ओहाना ने यह मेडल पीएम मोदी को प्रदान किया, जो उनके व्यक्तिगत नेतृत्व के माध्यम से भारत-इजरायल रणनीतिक संबंधों को मजबूत करने और ऊंचाइयों पर ले जाने में दिए गए असाधारण योगदान की मान्यता है। यह मेडल विशेष रूप से भारत और इजराइल के बीच गहरी दोस्ती और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों को समर्पित है। पीएम मोदी ने इस सम्मान को स्वीकार करते हुए इसे दोनों देशों की स्थायी मित्रता का प्रतीक बताया और विनम्रता से ग्रहण किया।
इजरायली संसद (केसेट) में 25 फरवरी 2026 को अपने ऐतिहासिक संबोधन के बाद उन्हें ‘स्पीकर ऑफ द नेसेट मेडल’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान इज़राइली संसद का सर्वोच्च संसदीय अलंकरण है। यह पदक केसेट के स्पीकर अमीर ओहाना द्वारा प्रदान किया गया, जिससे प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक नेता बन गए।
यह पुरस्कार भारत–इज़राइल के रणनीतिक संबंधों को सुदृढ़ करने में उनके “असाधारण योगदान” के लिए दिया गया, जिसमें रक्षा, नवाचार, प्रौद्योगिकी और व्यापार के क्षेत्र में सहयोग शामिल है। इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत–इज़राइल संबंधों को “अद्भुत मित्रता” बताते हुए दोनों देशों के बीच मजबूत व्यक्तिगत और द्विपक्षीय संबंधों की सराहना की।
वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘फिलिस्तीन राज्य का ग्रैंड कॉलर’ से सम्मानित किया गया, जो विदेशी नेताओं को दिया जाने वाला फिलिस्तीन का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है। यह पुरस्कार फिलिस्तीन के राष्ट्रपति महमूद अब्बास द्वारा भारत के फिलिस्तीनी आकांक्षाओं के समर्थन और द्विपक्षीय सहयोग के सम्मान में प्रदान किया गया। यह सम्मान विश्व के कई प्रमुख नेताओं को भी दिया जा चुका है, जिससे प्रधानमंत्री मोदी एक विशिष्ट कूटनीतिक श्रेणी में शामिल हुए।
यरूशलम में Knesset को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराया। अपने संबोधन में उन्होंने 26/11 मुंबई हमलों को याद किया और 7 अक्टूबर 2023 के हमलों के पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ समन्वित वैश्विक कार्रवाई का आह्वान करते हुए कहा कि “कहीं भी आतंक, हर जगह शांति के लिए खतरा है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आतंकवाद से निपटने के लिए बिना किसी दोहरे मापदंड के निरंतर अंतरराष्ट्रीय सहयोग आवश्यक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित गाजा शांति पहल के प्रति भी समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने संवाद और कूटनीति के प्रति प्रतिबद्धता, स्थायी और न्यायपूर्ण शांति के समर्थन तथा क्षेत्रीय स्थिरता की भारत की निरंतर नीति पर जोर दिया। उनके वक्तव्य ने पश्चिम एशिया में भारत के संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाया—जहाँ एक ओर इज़राइल के साथ मजबूत संबंध बनाए रखे गए हैं, वहीं दूसरी ओर फिलिस्तीनी राष्ट्र की आकांक्षाओं और शांति प्रयासों का समर्थन भी जारी है।
इज़राइल और फिलिस्तीन दोनों से सर्वोच्च सम्मान प्राप्त करना एक दुर्लभ कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भारत-इज़राइल रणनीतिक साझेदारी को मजबूती मिली है, फिलिस्तीन के साथ सद्भाव कायम रहा है, भारत की वैश्विक कूटनीतिक प्रतिष्ठा बढ़ी है और स्वतंत्र विदेश नीति को बल मिला है। वर्ष 2026 की इज़राइल यात्रा प्रधानमंत्री मोदी की नौ वर्षों में दूसरी यात्रा है, जिसने द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा किया है।
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