MNRE ने भारत की पहली राष्ट्रीय भूतापीय ऊर्जा नीति शुरू की

भारत के स्वच्छ ऊर्जा पोर्टफोलियो को विस्तार देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए नव और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) ने राष्ट्रीय भू-ऊर्जा नीति लॉन्च की है। यह भारत की पहली नीति है जो विशेष रूप से पृथ्वी की आंतरिक ऊष्मा से प्राप्त भू-ऊर्जा (Geothermal Energy) के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए बनाई गई है।

यह पहल नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्य, ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा नवाचार को बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। प्रतियोगी परीक्षा के दृष्टिकोण से यह विषय पर्यावरण, ऊर्जा क्षेत्र, जलवायु लक्ष्य और सरकारी पहल के अंतर्गत अत्यंत महत्वपूर्ण है।

भू-ऊर्जा (Geothermal Energy) क्या है?

भू-ऊर्जा वह ऊष्मा है जो पृथ्वी की सतह के नीचे संग्रहित होती है। इसका उपयोग —

  • बिजली उत्पादन,

  • हीटिंग व कूलिंग सिस्टम,

  • ग्रीनहाउस कृषि,

  • समुद्री जल के लवण-निर्मूलन (Desalination) — आदि में किया जा सकता है।

सौर या पवन ऊर्जा के विपरीत, भू-ऊर्जा 24×7 उपलब्ध रहती है, इसलिए इसे एक विश्वसनीय नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत माना जाता है।

राष्ट्रीय भू-ऊर्जा नीति की मुख्य विशेषताएँ

इस नीति का उद्देश्य विभिन्न प्रयासों को एकीकृत करना, अनुसंधान एवं विकास (R&D) को प्रोत्साहित करना और भू-ऊर्जा परियोजनाओं में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना है।

प्रमुख प्रावधान

  • नियामक भूमिका : नियमन और विकास के लिए नव एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) केंद्रीय निकाय होगा।

  • सहयोग पर बल : अंतःमंत्रालयी समन्वय, संयुक्त उद्यम और वैश्विक साझेदारी पर फोकस।

  • प्रौद्योगिकी विकास : हाइब्रिड सिस्टम (जैसे भू-ऊर्जा + सौर ऊर्जा), उन्नत R&D और छोड़े गए तेल कुओं का भू-ऊर्जा निष्कर्षण के लिए पुनः उपयोग।

  • पब्लिक-प्राइवेट इकोसिस्टम : स्टार्टअप्स, शोध संस्थानों और उद्योगों को जोड़ने वाला मज़बूत ढाँचा।

  • स्थानीय नवाचार को बढ़ावा : स्वदेशी तकनीकों, पायलट प्रोजेक्ट्स और अकादमिक-उद्योग संबंधों के लिए प्रोत्साहन।

भारत में पहचाने गए भू-ऊर्जा प्रांत

भारत ने लगभग 10 भू-ऊर्जा प्रांतों की पहचान की है जिनमें ऊष्मीय क्षमता अधिक है:

  • हिमालय

  • कंबे बेसिन

  • अरावली श्रृंखला

  • महानदी बेसिन

  • गोदावरी बेसिन

  • अन्य क्षेत्र : सोहाना, पश्चिमी तट, सोन-नर्मदा-ताप्ती, दक्षिण भारत के क्रैटॉन

भारत की अनुमानित भू-ऊर्जा क्षमता लगभग 10 गीगावाट (GW) आंकी गई है।

स्थैतिक तथ्य

  • नीति का नाम : राष्ट्रीय भू-ऊर्जा नीति (National Geothermal Energy Policy)

  • लॉन्च करने वाला : नव एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE)

  • नीति का लक्ष्य : विभिन्न क्षेत्रों में भू-ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना

  • अनुमानित क्षमता : 10 गीगावाट (GW)

  • पहचाने गए प्रांत : हिमालय, कंबे, अरावली, महानदी, गोदावरी आदि

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vikash

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