मिची बेंटहॉस अंतरिक्ष में जाने वाली पहली व्हीलचेयर यूज़र बनकर इतिहास रचेंगी

जर्मन एयरोस्पेस इंजीनियर मिची बेंटहॉस अंतरिक्ष यात्रा करने वाली पहली व्हीलचेयर उपयोगकर्ता व्यक्ति बनने जा रही हैं। वह ब्लू ओरिजिन (Blue Origin) के न्यू शेपर्ड रॉकेट की आगामी NS-37 सबऑर्बिटल मिशन पर उड़ान भरेंगी। यह उपलब्धि मानव अंतरिक्ष उड़ान को अधिक समावेशी और सुलभ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम मानी जा रही है।

मिची बेंटहॉस कौन हैं

  • मिची बेंटहाउस एक जर्मन एयरोस्पेस और मेकाट्रॉनिक्स इंजीनियर हैं।
  • वह 2024 से यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) में यंग ग्रेजुएट ट्रेनी के रूप में कार्यरत हैं।
  • वर्ष 2018 में माउंटेन बाइकिंग दुर्घटना के कारण उन्हें रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लगी, जिसके बाद से वह व्हीलचेयर का उपयोग कर रही हैं।
  • इस जीवन बदलने वाली घटना के बावजूद उन्होंने एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में अपना करियर जारी रखा और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को और मजबूत किया।

पेशेवर अनुभव और अंतरिक्ष प्रशिक्षण

  • मिची बेंटहॉस को मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ा महत्वपूर्ण अनुभव प्राप्त है।
  • उन्होंने पैराबोलिक ज़ीरो-ग्रैविटी फ्लाइट्स में भाग लिया है, जिनमें भारहीनता की स्थिति का अभ्यास कराया जाता है।
  • वह पोलैंड के लुनारेस रिसर्च स्टेशन में आयोजित दो सप्ताह के एनालॉग एस्ट्रोनॉट मिशन में मिशन कमांडर भी रह चुकी हैं, जो व्हीलचेयर-सुलभ सुविधा है।
  • ये अनुभव यह दर्शाते हैं कि समावेशी अंतरिक्ष प्रशिक्षण पूरी तरह संभव है।

NS-37 मिशन के बारे में

  • NS-37 मिशन एक सबऑर्बिटल फ्लाइट है, जिसमें माइकेला सहित कुल छह यात्री सवार होंगे।
  • यह उड़ान पृथ्वी के वायुमंडल से बाहर जाकर कार्मान रेखा (Kármán Line) को पार करेगी, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अंतरिक्ष की सीमा माना जाता है।
  • यात्रियों को कुछ मिनटों तक माइक्रोग्रैविटी (भारहीनता) का अनुभव होगा, इसके बाद यान पृथ्वी पर वापस लौट आएगा।
  • मिची की भागीदारी इस मिशन को ऐतिहासिक बनाती है।

इस उपलब्धि का महत्व

  • मिची बेंटहॉस की अंतरिक्ष यात्रा STEM और अंतरिक्ष अन्वेषण में समावेशन का प्रतीक है।
  • यह धारणा को चुनौती देती है कि अंतरिक्ष मिशन केवल शारीरिक रूप से सक्षम लोगों तक सीमित हैं।
  • यह उपलब्धि सुलभ अंतरिक्ष यान, प्रशिक्षण केंद्र और मिशन प्रक्रियाओं के विकास को भी प्रोत्साहित करेगी।
  • साथ ही, यह दुनिया भर के दिव्यांग व्यक्तियों को यह संदेश देती है कि शारीरिक सीमाएं सपनों की सीमा नहीं होतीं।

मुख्य बिंदु

  • मिची बेंटहॉस अंतरिक्ष जाने वाली पहली व्हीलचेयर उपयोगकर्ता बनेंगी।
  • वह ब्लू ओरिजिन के न्यू शेपर्ड NS-37 मिशन पर उड़ान भरेंगी।
  • वह एक जर्मन एयरोस्पेस और मेकाट्रॉनिक्स इंजीनियर हैं और ESA से जुड़ी हैं।
  • वर्ष 2018 से वह रीढ़ की चोट के कारण व्हीलचेयर का उपयोग कर रही हैं।
  • यह मिशन अंतरिक्ष अन्वेषण में समावेशन और सुलभता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
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vikash

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