फ्रांस में पेरिस के चार्ल्स डी गॉल हवाई अड्डे पर 18 साल तक रहने वाले ईरानी व्यक्ति मेहरान करीमी नासेरी का हवाई अड्डे पर ही दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे 76 साल के थे। मेहरान करीमी को ‘द टर्मिनल’ फिल्म की वजह से पूरी दुनिया में जाना जाता है।
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मेहरान नासेरी 1988 में पहली बार शरणार्थी के तौर पर फ्रांस आए थे। लेकिन कुछ कानूनी झमेले में फंस जाने कारण फ्रांस की सरकार ने उन्हें देश में शरण नहीं दी। इसके बाद वह एयरपोर्ट पर ही रहने को मजबूर हो गए और उन्होंने चार्ल्स डी गॉल एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 को ही अपना घर बना लिया। एयरपोर्ट पर रहकर नासेरी ने अपना अधिकांश समय डायरी लिखने, पत्र-पत्रिकाएं पढ़ने और वहां गुजरने वाले यात्रियों का सर्वेक्षण करने में बिताया।
नासेरी का जन्म 1945 में ईरान के एक हिस्से सुलेमान में हुआ था, जो तब ब्रिटिश अधिकार क्षेत्र में आता था। नासेरी के पिता एक ईरानी और मां एक स्कॉटिश नागिरक थीं। उन्होंने 1974 में इंग्लैंड में अध्ययन करने के लिए ईरान छोड़ दिया। जब वे लौटे, तो उन्हें शाह के खिलाफ विरोध करने के लिए कैद किया गया था और बिना पासपोर्ट के ही निष्कासित कर दिया गया था।
नासेरी ने 2004 में प्रकाशित द टर्मिनल मैन नामक एक आत्मकथा भी लिखी थी। इसके बाद स्टीवन स्पीलबर्ग ने नासेरी की स्थिति को देखकर 2004 में फिल्म द टर्मिनल बनाने का फैसला किया। इसमें टॉम हैंक्स ने एक पूर्वी यूरोपीय व्यक्ति की भूमिका निभाई थी, जो अमेरिका में प्रवेश से वंचित होने के बाद न्यूयॉर्क के जॉन एफ कैनेडी एयरपोर्ट पर रहता है।
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