
एकनाथ शिंदे को 22 फरवरी को उनकी पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में शिवसेना प्रमुख नामित किया गया। चुनाव आयोग द्वारा शिव सेना का नाम और चुनाव चिन्ह एकनाथ शिंदे गुट को देने के बाद मंगलवार के एकनाथ शिंदे को पार्टी का प्रमुख चुन लिया गया। मुंबई में हुई पार्टी कार्यकारिणी की बैठक में शिवसेना प्रमुख के तौर पर शिंदे के नाम का एलान किया गया। पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में विधायक, सांसद और शिवसेना के अन्य नेता शामिल हुए।
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मुख्य बिंदु
- हाल ही में चुनाव आयोग ने उद्धव ठाकरे गुट के साथ अपने विवाद में शिंदे गुट को असली शिवसेना के रूप में मान्यता दी और उसे पार्टी का चुनाव चिन्ह धनुष और बाण’ आवंटित किया।
- एकनाथ शिंदे को पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह मिलने के बाद शिवसेना की यह पहली राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक थी।
- इस बैठक में वीर सावरकर को भारत रत्न देने के प्रस्ताव समेत कई अहम प्रस्ताव पेश किए गए।
- इसके अलावा राज्य में सभी परियोजनाओं में स्थानीय युवाओं को रोजगार के अधिक से अधिक अवसर देने तथा मराठी भाषा को कुलीन भाषा का दर्जा देने का प्रस्ताव पेश किया गया।
एकनाथ शिंदे के बारे में
- शिवसेना के नेता के रूप में उभरने से पहले, एकनाथ संभाजी शिंदे जीविकोपार्जन के लिए एक ऑटो-रिक्शा चलाते थे।
- 9 फरवरी 1964 को जन्मे शिंदे ने स्नातक की पढ़ाई पूरी करने से पहले ही कॉलेज छोड़ दिया था।
- वह 58 वर्ष के हैं और पश्चिमी महाराष्ट्र के सतारा जिले के रहने वाले हैं, उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत ठाणे, मुंबई से की थी।
- वह चार बार के विधायक हैं, जिन्होंने उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पिछली महा विकास अघडी (एमवीए) सरकार में शहरी विकास और पीडब्ल्यूडी विभागों को संभाला था।
- शिंदे को 2014 में संक्षिप्त अवधि के लिए महाराष्ट्र विधानसभा में विपक्ष का नेता नियुक्त किया गया था।



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