फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस ने 18 फरवरी 2026 को महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) पर सहयोग के लिए संयुक्त आशय घोषणा (Joint Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों ने महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों की खोज, उत्खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। इसका उद्देश्य हरित और डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए मजबूत एवं लचीली आपूर्ति शृंखलाएं तैयार करना है। मुंबई में हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय वार्ता के बाद इस घोषणा को भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी में एक नए मील के पत्थर के रूप में देखा जा रहा है।
भारत-फ्रांस महत्वपूर्ण खनिज सहयोग एक संयुक्त आशय घोषणा के माध्यम से औपचारिक रूप से स्थापित हुआ। यह समझौता दुर्लभ पृथ्वी तत्वों और अन्य आवश्यक खनिजों की विविध और टिकाऊ आपूर्ति शृंखला सुनिश्चित करने पर केंद्रित है। ये खनिज स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रिक वाहन, सेमीकंडक्टर और उन्नत विनिर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। भारत के राजदूत संजीव कुमार सिंगला ने संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी विकास समूह के गठन की जानकारी भी दी। यह समझौता उभरती प्रौद्योगिकियों और औद्योगिक लचीलापन के क्षेत्र में बढ़ते रणनीतिक सहयोग को दर्शाता है।
महत्वपूर्ण खनिज नवीकरणीय ऊर्जा प्रणालियों, बैटरी भंडारण, डिजिटल अवसंरचना और रक्षा विनिर्माण के लिए आधारभूत भूमिका निभाते हैं। दुर्लभ पृथ्वी तत्वों का उपयोग पवन टर्बाइन, इलेक्ट्रिक वाहन, सौर पैनल और उच्च तकनीकी इलेक्ट्रॉनिक्स में होता है। खोज, उत्खनन, प्रसंस्करण और पुनर्चक्रण में साझेदारी के माध्यम से दोनों देश सीमित वैश्विक आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम करना चाहते हैं। यह पहल दीर्घकालिक आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करेगी और वैश्विक स्थिरता लक्ष्यों के तहत जलवायु प्रतिबद्धताओं को समर्थन देगी।
इस सहयोग के तहत भारत के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और फ्रांस के CNRS (नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च) के बीच एक आशय पत्र पर भी सहमति बनी। इसके तहत उन्नत सामग्रियों (Advanced Materials) पर एक केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव है, जिससे शोध सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। सीएनआरएस विश्व की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं में से एक है। साथ ही, दोनों देशों ने संयुक्त उन्नत प्रौद्योगिकी विकास समूह गठित करने का निर्णय लिया, जिससे नवाचार, औद्योगिक अनुसंधान और उभरती तकनीकों में सहयोग और गहरा होगा।
रणनीतिक वार्ताएं केवल महत्वपूर्ण खनिजों तक सीमित नहीं रहीं। दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन संघर्ष पर चिंता व्यक्त की और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के तहत संवाद एवं कूटनीति के माध्यम से न्यायपूर्ण और स्थायी शांति का समर्थन किया। गाज़ा शांति योजना के कार्यान्वयन और दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन को भी दोहराया गया।
इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में दोनों देशों ने स्वतंत्र, मुक्त और नियम-आधारित व्यवस्था के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (ISA) और आपदा प्रतिरोधी अवसंरचना के लिए गठबंधन (CDRI) जैसे मंचों के माध्यम से सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति बनी। यह व्यापक संवाद भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी को बहुआयामी और भविष्य उन्मुख बनाता है।
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