लोकसभा ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक, 2025 पारित किया, जिसके तहत असम के गुवाहाटी में नए भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ है। यह कदम पूर्वोत्तर भारत में प्रीमियर प्रबंधन शिक्षा का विस्तार करने की दिशा में एक बड़ा निर्णय माना जा रहा है और लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय मांग को पूरा करता है।
यह विधेयक भारतीय प्रबंधन संस्थान अधिनियम, 2017 में संशोधन कर आईआईएम गुवाहाटी को राष्ट्रीय प्रबंधन संस्थानों की सूची में शामिल करता है। इसके विकास, आधारभूत संरचना और संचालन के लिए केंद्र सरकार ₹550 करोड़ का वित्तीय अनुदान प्रदान करेगी।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस विधेयक की अहमियत बताते हुए कहा कि—
गुवाहाटी पूर्वोत्तर का प्रमुख शैक्षिक और आर्थिक केंद्र है।
आईआईएम की स्थापना से इस क्षेत्र के युवाओं को समान अवसर और गुणवत्तापूर्ण प्रबंधन शिक्षा मिलेगी।
यह संस्थान क्षेत्रीय विकास के लिए उत्प्रेरक (catalyst) का कार्य करेगा और निवेश व प्रतिभा आकर्षित करेगा।
यह पहल केवल शैक्षिक आकांक्षाओं की पूर्ति ही नहीं बल्कि समावेशी राष्ट्रीय विकास और पूर्वोत्तर को देश की शीर्ष शैक्षणिक संरचना से जोड़ने की दृष्टि को भी मजबूत करती है।
हालाँकि यह विधेयक पारित हो गया, लेकिन लोकसभा में इसे विपक्ष के हंगामे के बीच बिना बहस के ही मंजूरी मिली। बावजूद इसके, यह शिक्षा विस्तार को लेकर सर्वसम्मति जैसी राजनीतिक सहमति को दर्शाता है।
आईआईएम गुवाहाटी की स्थापना से—
पूर्वोत्तर भारत में प्रबंधन शिक्षा का ढाँचा मजबूत होगा।
दूरदराज़ और जनजातीय क्षेत्रों के युवाओं को पेशेवर शिक्षा में भागीदारी का अवसर मिलेगा।
असम व आसपास के राज्यों में नौकरी सृजन, शोध और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
उद्यमिता और स्थानीय व्यापार को प्रबंधन ज्ञान से सहयोग मिलेगा।
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