लोकसभा ने मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की अवधि 13 अगस्त, 2025 से आगे छह महीने के लिए बढ़ाने को मंजूरी देते हुए एक वैधानिक प्रस्ताव पारित किया है। केंद्र सरकार द्वारा समर्थित इस निर्णय का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पूर्वोत्तर राज्य में शांति और स्थिरता बनी रहे, जिसे अतीत में जातीय तनाव का सामना करना पड़ा है।
सरकार ने मणिपुर में शांति की वापसी पर दिया ज़ोर
संसद में चर्चा के दौरान केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन को आश्वस्त किया कि राष्ट्रपति शासन लागू होने के बाद मणिपुर में शांति लौट रही है। उन्होंने बताया कि पिछले चार महीनों में केवल एक व्यक्ति की मृत्यु हुई है और कोई अन्य गंभीर हिंसा नहीं हुई है, जिससे यह स्पष्ट है कि प्रदेश में स्थिति अब नियंत्रण में है। उन्होंने यह भी बताया कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर हो चुकी है और सरकार दोनों जातीय समुदायों के बीच संवाद और आपसी समझ के ज़रिए मतभेद सुलझाने के प्रयासों में लगी है। सरकार राज्य में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए लगातार कार्य कर रही है।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन की पृष्ठभूमि
मणिपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के कारण 13 फरवरी 2025 को पहली बार राष्ट्रपति शासन लागू किया गया था। संसद ने 2 अप्रैल 2025 को इसे छह महीने की प्रारंभिक अवधि के लिए मंजूरी दी थी। भारतीय संविधान के अनुसार, ऐसी मंजूरी एक बार में केवल छह महीने के लिए मान्य होती है और इसके बाद संसद को इसे आगे बढ़ाने का निर्णय लेना होता है। नित्यानंद राय द्वारा प्रस्तुत नए प्रस्ताव के अनुसार अब राष्ट्रपति शासन को फरवरी 2026 तक बढ़ा दिया गया है।
लोकसभा अध्यक्ष का बयान
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने पुष्टि की कि सदन ने अप्रैल में राष्ट्रपति शासन की मंजूरी दी थी और अब इस प्रस्ताव के माध्यम से इसे अगले छह महीनों के लिए बढ़ाया गया है।
विस्तार का महत्व
सरकार ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति शासन का विस्तार आवश्यक है ताकि,
– मणिपुर में कानून और व्यवस्था को और मजबूत किया जा सके,
– जातीय समुदायों के बीच विश्वास बहाल हो,
– हिंसा को रोका जा सके और सामाजिक सद्भाव कायम रहे,
– राज्य में स्थायी शांति और विकास के लिए अनुकूल वातावरण बनाया जा सके।
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