कर्नाटक ने कोडागु में दशकों पुराने मुद्दों को ठीक करने के लिए जम्मा बाने लैंड रिकॉर्ड्स में सुधार किया

कर्नाटक सरकार ने कोडागु क्षेत्र में भूमि प्रशासन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। भूमि राजस्व कानून में हालिया संशोधन के माध्यम से सरकार का उद्देश्य जम्मा बने (Jamma Bane) भूमि से जुड़ी दशकों पुरानी अभिलेखीय समस्याओं का समाधान करना है। इस सुधार से विशेष रूप से आदिवासी और स्थानीय समुदायों को लाभ मिलने की उम्मीद है, क्योंकि इससे स्वामित्व के स्पष्ट रिकॉर्ड, कानूनी मान्यता और बैंकिंग/वित्तीय सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित होगी।

क्यों चर्चा में है?

कर्नाटक सरकार ने कोडागु जिले की जम्मा बने भूमि के रिकॉर्ड में सुधार के लिए भूमि राजस्व कानून में संशोधन किया है। इस संशोधन को 7 जनवरी 2026 को राज्यपाल की स्वीकृति मिली और अब इसे आधिकारिक रूप से अधिसूचित कर दिया गया है।

भूमि राजस्व संशोधन को स्वीकृति

  • कर्नाटक भूमि राजस्व (द्वितीय संशोधन) अधिनियम, 2025 को राज्यपाल थावरचंद गहलोत की स्वीकृति के बाद अधिसूचित किया गया।
  • इसका उद्देश्य कोडागु की विशिष्ट भूमि रिकॉर्ड प्रणाली को कर्नाटक भूमि राजस्व अधिनियम, 1964 के अनुरूप बनाना है।
  • यह संशोधन भूमि (Bhoomi) परियोजना के तहत भूमि अभिलेखों के डिजिटलीकरण को भी मजबूती देता है।
  • इससे पीढ़ियों से चले आ रहे पुराने और असंगत रिकॉर्ड को कानूनी ढांचे के भीतर सुधारने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

जम्मा बने भूमि क्या हैं?

  • जम्मा बने भूमि कोडागु जिले की एक विशिष्ट वंशानुगत भूमि व्यवस्था है।
  • ये भूमि 17वीं से 19वीं शताब्दी के बीच कूर्ग के राजाओं और बाद में ब्रिटिश शासन द्वारा मुख्यतः सैन्य सेवा के बदले प्रदान की गई थीं।
  • इनमें धान के खेत और वनयुक्त ऊपरी भूमि शामिल थी, जिनमें से कई बाद में कॉफी बागानों में परिवर्तित हो गईं।
  • परंपरागत रूप से भूमि रिकॉर्ड में मूल पट्टेदार का नाम ही दर्ज रहता था, चाहे वास्तविक स्वामित्व पीढ़ियों में बदल गया हो।

पुराने भूमि रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याएं

  • कई पीढ़ियों के बाद भी रिकॉर्ड में मृत पूर्वजों के नाम पट्टेदार के रूप में दर्ज रहे।
  • इससे नामांतरण, उत्तराधिकार, बिक्री और बैंक ऋण प्राप्त करने में गंभीर कठिनाइयाँ उत्पन्न हुईं।
  • भले ही कूर्ग भूमि राजस्व अधिनियम, 1899 को 1964 के अधिनियम से बदल दिया गया था, लेकिन कुछ पुरानी प्रथाएं व्यवहार में बनी रहीं।
  • कर्नाटक उच्च न्यायालय ने Chekkera Poovaiah बनाम कर्नाटक राज्य सहित कई मामलों में कोडावा समुदाय के स्वामित्व अधिकारों को मान्यता दी है।

संशोधन से किए गए प्रमुख बदलाव

  • अब कोडागु के तहसीलदारों को विधिवत जांच के बाद रिकॉर्ड ऑफ राइट्स में त्रुटियों को सुधारने का अधिकार दिया गया है।
  • धारा 127 में एक नया उपखंड जोड़ा गया है, जिससे गलत या अनुचित ऐतिहासिक प्रविष्टियों को हटाया या सुधारा जा सकेगा।
  • पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए अपील की व्यवस्था भी प्रदान की गई है।
  • इन सुधारों से वास्तविक उत्तराधिकार के अनुरूप वैध और अद्यतन भूमि रिकॉर्ड उपलब्ध होंगे, जिससे स्थानीय समुदायों को दीर्घकालिक राहत मिलेगी।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

दुनिया का सबसे जहरीला बिच्छू कौन सा है?, जानें कहाँ पाए जाते हैं सबसे ज्यादा बिच्छू

धरती पर मौजूद सबसे डरावने जीवों में बिच्छू (Scorpion) का नाम जरूर लिया जाता है।…

1 week ago

भारत में कहाँ है एशियाई शेरों का असली घर? दुनिया की इकलौती जगह जहाँ जंगल में आज़ादी से घूमते हैं Asiatic Lions

शेरों का नाम सुनते ही लोगों के दिमाग में अफ्रीका के विशाल जंगलों की तस्वीर…

1 week ago

भारत का कौन-सा राज्य कहलाता है “Spice Garden of India”? जिसके मसालें दुनिया-भर में है मशहूर

भारत अपने मसालों के लिए सदियों से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध रहा है। भारतीय मसालों…

2 weeks ago

भारत का सबसे अमीर गांव कौन-सा है? यहां हर घर में करोड़ों की संपत्ति, बैंक में जमा हैं हजारों करोड़

भारत गांवों का देश कहा जाता है। यहां लाखों गांव हैं, जिनमें से कई आज…

2 weeks ago

क्या आप जानते हैं भारत का Tea Capital कौन-सा राज्य है? यहां उगती है सबसे ज्यादा चाय

रेलवे स्टेशन हो, ऑफिस हो या गांव की चौपाल — चाय हर जगह लोगों की…

2 weeks ago

भारत का कौन-सा शहर कहलाता है “Mini India”? जानिए क्यों मिली यह खास पहचान

भारत अपनी विविधता, संस्कृति, भाषाओं और परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।…

2 weeks ago