सिंगापुर की ‘ट्री लेडी’ के नाम से मशहूर कीर्तिदा मेकानी का निधन

भारत में जन्मी और सिंगापुर को कर्मभूमि बनाने वाली प्रसिद्ध पर्यावरणविद कीर्तिदा मेकानी का 19 जनवरी को 66 वर्ष की आयु में हृदयाघात से निधन हो गया। वे “ट्री लेडी” के नाम से व्यापक रूप से जानी जाती थीं। पिछले तीन दशकों से अधिक समय तक उन्होंने प्रकृति संरक्षण, सामुदायिक कल्याण और सांस्कृतिक विकास के लिए शांत लेकिन प्रभावशाली कार्य किया। उनके प्रयासों ने सिंगापुर के स्कूलों, उद्यानों, कला संस्थानों और हरित परिदृश्यों को गहराई से प्रभावित किया।

प्रारंभिक जीवन और प्रकृति से जुड़ाव

  • कीर्तिदा मेकानी का पालन-पोषण कर्नाटक (भारत) के एक पारिवारिक खेत में हुआ। बचपन में उन्होंने प्रकृति को करीब से समझा—जैसे जैविक कचरे का खाद (कम्पोस्ट) बनकर उपजाऊ मिट्टी में बदलना।
  • इन सरल अनुभवों ने उनके भीतर पर्यावरण के प्रति गहरा सम्मान पैदा किया और यह विश्वास दिया कि प्रकृति मानव जीवन को संतुलित और बेहतर दिशा दे सकती है।

सिंगापुर की यात्रा

वर्ष 1990 में कीर्तिदा अपने पति भरत मेकानी के साथ सिंगापुर चली गईं। हवाई अड्डे से शहर तक की यात्रा के दौरान दिखाई देने वाली हरियाली ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। यही पहला अनुभव आगे चलकर सिंगापुर को और अधिक हरित व टिकाऊ बनाने की उनकी प्रेरणा बना।

पर्यावरण जागरूकता में नेतृत्व

  • वर्ष 1993 में कीर्तिदा सिंगापुर एनवायरनमेंट काउंसिल की पहली कार्यकारी निदेशक बनीं।
  • अपने कार्यकाल में उन्होंने 50 से अधिक पर्यावरण संरक्षण एवं शिक्षा कार्यक्रमों की शुरुआत की, जिनसे छात्र, उद्योग और स्थानीय समुदाय जुड़े और दैनिक जीवन में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित हुई।

प्रसिद्ध ‘प्लांट-ए-ट्री’ कार्यक्रम

  • उनकी सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक था 2007 में नेशनल पार्क्स बोर्ड के साथ शुरू किया गया ‘प्लांट-ए-ट्री’ कार्यक्रम।
  • शुरुआत में लोगों को संदेह था कि आम नागरिक इसमें भाग लेंगे या नहीं, लेकिन कीर्तिदा को विश्वास था।
    आज तक इस कार्यक्रम के तहत—
  • 76,000 से अधिक पेड़ लगाए जा चुके हैं,
  • अनेक देशज (नेटिव) प्रजातियाँ शामिल की गईं,
  • और हजारों स्वयंसेवक जुड़े।

यह सिंगापुर का एक प्रमुख जन-आधारित हरित आंदोलन बन चुका है।

सामुदायिक उद्यानों का समर्थन

कीर्तिदा ने Community in Bloom कार्यक्रम में राजदूत के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
आज सिंगापुर में—

  • हजारों सामुदायिक उद्यान,
  • और दसियों हजार स्वयंसेवक

प्रकृति से जुड़कर सामूहिक रूप से कार्य कर रहे हैं, जिससे सामाजिक जुड़ाव भी मजबूत हुआ है।

शिक्षा और नवाचार में योगदान

  • वे United World College of South East Asia Foundation की ट्रस्टी रहीं, जहाँ छात्रों द्वारा संचालित वर्षावन पुनर्स्थापन परियोजनाओं को समर्थन दिया।
  • वर्ष 2016 में उन्होंने Biomimicry Singapore Network की सह-स्थापना की, जिसका उद्देश्य प्रकृति से सीख लेकर टिकाऊ नवाचार को बढ़ावा देना था।

कला और संस्कृति में योगदान

पर्यावरण के साथ-साथ किर्तिदा कला जगत में भी सक्रिय रहीं।
वे—

  • LASALLE College of the Arts,
  • और Singapore Indian Fine Arts Society के बोर्ड की सदस्य रहीं।

एक कुशल सिरेमिक कलाकार के रूप में उन्होंने अपनी कला प्रदर्शित कर यह दिखाया कि रचनात्मकता और प्रकृति-संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं।

वैश्विक संरक्षण प्रयास

किर्तिदा ने कई अंतरराष्ट्रीय संरक्षण संगठनों के साथ काम किया।
वे WWF Singapore के बोर्ड में रहीं और—

  • पौध संरक्षण,
  • समुद्री जैवविविधता,
  • तथा कुसु द्वीप के आसपास प्रवाल भित्ति (कोरल) पुनर्स्थापन
    जैसी परियोजनाओं का समर्थन किया।

पुरस्कार और सम्मान

उनकी आजीवन सेवाओं के लिए—

  • 2015 में उन्हें सिंगापुर का President’s Award for the Environment,
  • और 2024 में Singapore Women’s Hall of Fame में Champion of the Environment के रूप में शामिल किया गया।

कीर्तिदा मेकानी की स्मृति

  • जो लोग उन्हें जानते थे, वे उन्हें विनम्र, संवेदनशील और करुणामयी व्यक्तित्व के रूप में याद करते हैं।
  • उनके पति भरत मेकानी के अनुसार, वे उद्देश्य और करुणा से भरा जीवन जीती थीं।
  • आज भले ही वे हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके लगाए पेड़, संजोए गए उद्यान और प्रेरित लोग उनकी उपस्थिति को जीवित रखते हैं।

कीर्तिदा मेकानी की विरासत

  • कीर्तिदा मेकानी का जीवन यह सिखाता है कि एक व्यक्ति भी प्रकृति और समाज के प्रति प्रेम के साथ बड़ा बदलाव ला सकता है।
  • उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को सतत जीवन-शैली अपनाने और धरती की रक्षा करने के लिए प्रेरित करती रहेगी।
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vikash

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