जम्मू और कश्मीर प्रशासन के डिजिटल तरीके को पूरी तरह से अपनाने वाला भारत का पहला केंद्र शासित प्रदेश बन गया है। जम्मू और कश्मीर में सभी सरकारी और प्रशासनिक सेवाएं वर्तमान में केवल डिजिटल रूप से प्रदान की जाती हैं। जम्मू-कश्मीर पारदर्शी और जवाबदेह शासन प्रणाली पर ध्यान देने के साथ ही देश भर में डिजिटल सरकार के एक मॉडल के रूप भी में उभर रहा है। आईटी की मदद से और सरकार की कई डिजिटल पहलें सरकारी सिस्टम में पारदर्शिता ला रही हैं। तेजी के साथ हो रहा विकास जम्मू-कश्मीर की नई पहचान बन रहा है। प्रदेश में अब सभी ऑफलाइन सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं।
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जम्मू-कश्मीर में अब सभी सरकारी सेवाएं केवल ऑनलाइन मोड के माध्यम से ही उपलब्ध होंगी। इस फैसले के द्वारा सरकार का लक्ष्य ऐसी प्रणाली स्थापित करना है जो लोगों को कहीं भी, कभी भी, किसी भी डिवाइस पर उच्च गुणवत्ता वाली सेवाओं तक पहुंचने के सक्षम बनाती हो। सरकार के इस कदम से जहां एक ओर पारदर्शिता बढ़ेगी वहीं दूसरी ओर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से भी मुक्ति मिलेगी।
सरकार की सेवाओं को ऑनलाइन करने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य लोगों को लाइन टू ऑनलाइन करना है। इसके तहत नागरिक सरकारी ऑफिस जाए बिना सरकारी सेवाओं का लाभ डिजिटली उठा सकते हैं। सरकारी दफ्तरों का डिजिटलीकरण होने से अब सरकारी कार्यालय नागरिकों की जेब में होगा। इससे नागरिक बिना किसी कार्यालय में जाए किसी भी सरकारी सेवा का लाभ कहीं भी और कभी भी उठा सकते हैं।
ऑनलाइन सेवाओं को लेकर नागरिकों में कोई शंका न हो इसके लिए जनता में पर्याप्त जागरूकता पैदा की जाएगी। ऑनलाइन सेवाओं को लेकर जनता में पर्याप्त जागरूकता पैदा करने के लिए अभियान चलाया जायेगा। ये जागरूकता कार्यक्रम शिक्षण संस्थानों और पंचायत स्तर पर चलाया जाएगा।
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