भारतीय आर्थिक सेवा के अधिकारी जितेश जॉन ने भारतीय दिवालिया एवं शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के कार्यकारी निदेशक के रूप में कार्यभार संभाल लिया है। इससे पहले वह ऊर्जा मंत्रालय में आर्थिक सलाहकार के रूप में सेवाएं दे चुके हैं।
जॉन ने अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर किया है। भारत सरकार में विभिन्न पदों पर उन्होंने 21 वर्ष से अधिक समय तक सेवाएं दी हैं। साथ ही वित्त, ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और लघु व मझोले उद्यमों जैसे विभिन्न क्षेत्रों में भी काम किया है। आईबीबीआई ने अक्टूबर में घोषणा की थी कि संदीप गर्ग ने पूर्णकालिक सदस्य के रूप में कार्यभार संभाला है। आईबीबीआई, दिवाला ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) को लागू करने वाली एक प्रमुख संस्था है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक बुधवार से शुरू हो रही है। एमपीसी के नतीजे शुक्रवार को आएंगे। माना जा रहा है कि केंद्रीय बैंक एक बार फिर से रेपो दर को 6.5 फीसदी पर यथावत रख सकता है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों का कहना है कि आरबीआई चालू वित्त वर्ष में रेपो दर में परिवर्तन नहीं करेगा। केयर रेटिंग्स ने कहा, इस बैठक में आरबीआई वित्त वर्ष 2024 के लिए अपने पहले के विकास अनुमानों को 20-30 बीपीएस तक संशोधित कर सकता है।
तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के लिए समाधान प्रक्रिया में तेजी लाने के उद्देश्य से यह विधायी ढांचा, अधिक कुशल और सरलीकृत दृष्टिकोण की पेशकश करते हुए दिवाला और दिवालियापन की कार्यवाही को सुव्यवस्थित करना चाहता है। दो न्यायाधिकरण, अर्थात् एनसीएलटी (राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण) और ऋण वसूली न्यायाधिकरण, आईबीबीआई के दायरे में आने वाले मामलों को संभालने में सहायक हैं।
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