भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम तेज़ी से विस्तार के दौर से गुजर रहा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आने वाले दशक के लिए अत्यंत महत्वाकांक्षी योजनाएँ प्रस्तुत की हैं। चंद्रमा अभियानों, मानव अंतरिक्ष उड़ान, और अपने स्वयं के अंतरिक्ष स्टेशन के निर्माण पर ध्यान केंद्रित करते हुए, ISRO भारत की वैश्विक स्थिति को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है। यह न केवल वैज्ञानिक और रणनीतिक शक्ति बढ़ाता है बल्कि विशाल आर्थिक और तकनीकी अवसर भी खोलता है।
ISRO ने अगले तीन वर्षों में उपग्रह और यान उत्पादन को तीन गुना बढ़ाने की योजना बनाई है ताकि लॉन्च और वैज्ञानिक मिशनों की बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके। वर्तमान वित्त वर्ष में ISRO 7 और लॉन्च करने की तैयारी में है, जिनमें शामिल हैं:
वाणिज्यिक संचार उपग्रह
PSLV और GSLV मिशन
पहला पूर्णतः उद्योग-निर्मित PSLV
यह विस्तार भारत की बढ़ती वैश्विक अंतरिक्ष बाजार उपस्थिति और निजी क्षेत्र की भागीदारी को मजबूत करता है।
चंद्रयान-4 भारत का पहला लूनर सैंपल-रिटर्न मिशन होगा — देश का अब तक का सबसे उन्नत चंद्र अभियान।
चंद्र मिट्टी और चट्टानों के नमूने वापस लाने के लिए डिज़ाइन
अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत चौथा देश बनेगा
मानव अंतरिक्ष खोज कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण कदम
ISRO गगनयान मिशन पर तेजी से काम कर रहा है — भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन, जिसकी उड़ान 2027 में प्रस्तावित है।
पहले 3 मानव-रहित उड़ानें होंगी
प्रशिक्षण और मॉड्यूल विकास जारी
भारत अंतरिक्ष में मानव भेजने वाले चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल होगा
सरकार ने ISRO को 2040 तक भारतीय अंतरिक्षयात्रियों को चंद्रमा पर भेजने और सुरक्षित वापस लाने का लक्ष्य भी दिया है।
ISRO की एक और बड़ी परियोजना है भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन।
पहला मॉड्यूल: 2028 में लॉन्च
पूरा स्टेशन: 2035 तक
भारत दुनिया का तीसरा देश बनेगा जो अपना स्वतंत्र अंतरिक्ष स्टेशन संचालित करेगा
यह दीर्घकालिक मिशनों और उन्नत अनुसंधान को सक्षम करेगा
भारत का वर्तमान वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में हिस्सा 2% (USD 8.2 बिलियन) है।
2030 तक 8% हिस्सेदारी
2033 तक USD 44 बिलियन का अनुमानित आकार
450+ उद्योग और 330 से अधिक स्टार्टअप अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र में सक्रिय
2020 के अंतरिक्ष सुधारों ने निजी क्षेत्र के लिए रॉकेट निर्माण, उपग्रह विकास और लॉन्च सेवाओं को खोलकर तेज़ी से विकास को प्रोत्साहित किया है।
LUPEX मिशन: भारत–जापान का संयुक्त मिशन, चंद्र दक्षिणी ध्रुव पर जल-बर्फ की खोज
वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों और उद्योग भागीदारों के साथ विस्तारित सहयोग
ये मिशन भारत को एक विश्वसनीय अंतरिक्ष साझेदार और तकनीकी नेता के रूप में स्थापित करते हैं।
चंद्रयान-4: 2028
गगनयान मानव मिशन: 2027
भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन: पहला मॉड्यूल 2028; पूरा स्टेशन 2035
स्पेसक्राफ्ट उत्पादन: अगले 3 वर्षों में तीन गुना
भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था हिस्सेदारी: 2030 तक 8%
निजी भागीदारी: 450+ उद्योग, 330 स्टार्टअप
वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था: 2025 में USD 630 बिलियन; 2035 तक USD 1.8 ट्रिलियन अनुमानित
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