क्यों मनाया जाता है अजन्मे बच्चे का अंतरराष्ट्रीय दिवस

अंतरराष्ट्रीय अजन्मे शिशु दिवस प्रत्येक वर्ष 25 मार्च को विश्वभर में मनाया जाता है। यह दिन प्रत्येक बच्चे को एक अनमोल उपहार के रूप में मान्यता देने और आशा व नए आरंभ का प्रतीक बनने पर बल देता है। इस दिवस का उद्देश्य अजन्मे बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

अंतरराष्ट्रीय अजन्मे शिशु दिवस का इतिहास और महत्व

अंतरराष्ट्रीय अजन्मे शिशु दिवस की स्थापना पोप जॉन पॉल द्वितीय ने की थी, जिन्होंने जीवन के आरंभिक चरणों से ही उसकी रक्षा की वकालत की। उन्होंने इस दिन को “जीवन के पक्ष में एक अनुकूल विकल्प” के रूप में देखा और 25 मार्च को इसकी आधिकारिक तिथि घोषित की।

यह तिथि इसलिए चुनी गई क्योंकि यह क्रिसमस से ठीक नौ महीने पहले पड़ती है, जो यीशु मसीह के जन्म का प्रतीक है। यह दिन ‘फीस्ट ऑफ़ द एन्नशिएशन’ (घोषणा का पर्व) से भी मेल खाता है, जो उस क्षण की याद दिलाता है जब यीशु माता मरियम के गर्भ में आए थे। इस दिन का उद्देश्य अजन्मे जीवन के महत्व को रेखांकित करना और समाज से उनके अधिकारों को स्वीकारने का आह्वान करना है।

अजन्मे शिशु के कानूनी अधिकार: एक जटिल मुद्दा

अजन्मे बच्चे के अधिकारों को लेकर कानूनी बहस बनी रहती है। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या भ्रूण को एक संपूर्ण मानव के समान कानूनी अधिकार प्राप्त हैं? इस विषय पर स्पष्टता लाने के लिए हिमाचल हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज शशवत से ईटीवी भारत ने कानूनी परामर्श लिया।

अजन्मे शिशु के कानूनी संरक्षण

वरिष्ठ अधिवक्ता नीरज शशवत के अनुसार, अजन्मे बच्चे को जन्म लेने वाले शिशु के समान संवैधानिक अधिकार प्राप्त नहीं होते हैं, लेकिन कानून में उसके जीवन की सुरक्षा के लिए कुछ प्रावधान अवश्य हैं।

  1. गर्भपात कानून – गर्भपात को सख्त कानूनी नियमों के तहत नियंत्रित किया जाता है, और अवैध गर्भपात एक अपराध माना जाता है।

  2. जीवन की मान्यता – तीसरे या चौथे सप्ताह में जब भ्रूण का हृदय धड़कना शुरू करता है, तो इसे जीवित माना जाता है।

  3. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 – यह जीवन के अधिकार को परिभाषित करता है, लेकिन यह अधिकार केवल जन्म के बाद ही लागू होता है।

  4. माता के अधिकार प्राथमिक – कानूनी अधिकार पहले मां को दिए जाते हैं, और जन्म के बाद ही बच्चे को पूर्ण अधिकार मिलते हैं।

अजन्मे शिशु के संपत्ति अधिकार

भारतीय कानून के तहत, अजन्मे बच्चे को संपत्ति का उत्तराधिकार प्राप्त होता है। कुछ विशेष प्रावधान उसके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करते हैं:

  1. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (धारा 20) – अजन्मे बच्चे को पारिवारिक संपत्ति पर अधिकार प्रदान करता है।

  2. संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम (धारा 13) – किसी व्यक्ति को अजन्मे बच्चे के नाम पर संपत्ति हस्तांतरित करने की अनुमति देता है, बशर्ते कि एक ट्रस्टी को जन्म के बाद तक संपत्ति का प्रबंधन सौंपा जाए।

  3. जन्म के बाद अधिकार – जैसे ही बच्चा जन्म लेता है, उसे कानूनी रूप से दी गई संपत्ति का पूरा उत्तराधिकार प्राप्त हो जाता है।

  4. गर्भपात और संपत्ति वितरण – यदि महिला को गर्भपात हो जाता है, तो अगला जन्मा बच्चा संपत्ति का उत्तराधिकारी बनता है। यदि कोई बच्चा नहीं होता, तो संपत्ति मां के नाम पर रहती है।

गर्भवती महिलाओं के लिए मृत्युदंड से कानूनी सुरक्षा

अजन्मे जीवन की रक्षा के लिए भारतीय कानून गर्भवती महिलाओं को मृत्युदंड से बचाता है:

  1. सजा का निलंबन या परिवर्तन – यदि गर्भवती महिला को मृत्युदंड दिया जाता है, तो उसकी सजा या तो स्थगित कर दी जाती है या आजीवन कारावास में बदल दी जाती है।

  2. भारतीय दंड संहिता (धारा 312-316) – किसी भी व्यक्ति को उत्तरदायी ठहराती है यदि वह किसी अजन्मे बच्चे को जीवित जन्म लेने से रोकता है या गर्भपात का कारण बनता है।

  3. सीमांकन अधिनियम (धारा 6) – अजन्मे बच्चे को “अवयस्क” की श्रेणी में रखता है और उसके कानूनी अधिकारों की रक्षा करता है।

लिंग परीक्षण पर प्रतिबंध

  1. पूर्व-गर्भाधान और पूर्व-प्रसव नैदानिक तकनीक (PCPNDT) अधिनियम – लिंग परीक्षण को प्रतिबंधित करता है ताकि कन्या भ्रूण हत्या को रोका जा सके और लिंग समानता सुनिश्चित की जा सके।

  2. कठोर कानूनी दंड – इस कानून का उल्लंघन करने पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।

अंतरराष्ट्रीय अजन्मे शिशु दिवस इस बात की याद दिलाता है कि जीवन की रक्षा जन्म से पहले भी की जानी चाहिए। यह दिन समाज को अजन्मे बच्चों के अधिकारों की रक्षा करने और उनके महत्व को स्वीकारने की दिशा में प्रेरित करता है।

पहलू विवरण
क्यों चर्चा में? अंतरराष्ट्रीय अजन्मे शिशु दिवस 25 मार्च को मनाया जाता है ताकि अजन्मे बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सके।
स्थापना पोप जॉन पॉल द्वितीय द्वारा अजन्मे बच्चों के सम्मान और जीवन समर्थक मूल्यों को प्रोत्साहित करने के लिए स्थापित।
ऐतिहासिक महत्व 25 मार्च इसलिए चुना गया क्योंकि यह क्रिसमस (यीशु मसीह के जन्म) से नौ महीने पहले पड़ता है।
कानूनी अधिकार अजन्मे बच्चों को समान संवैधानिक अधिकार नहीं मिलते, लेकिन उनके जीवन और उत्तराधिकार की रक्षा के लिए कानून मौजूद हैं।
संपत्ति अधिकार हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम और संपत्ति हस्तांतरण अधिनियम अजन्मे बच्चों को संपत्ति विरासत में देने की अनुमति देते हैं।
मृत्युदंड से सुरक्षा गर्भवती महिलाओं को फांसी नहीं दी जा सकती; उनकी सजा या तो निलंबित कर दी जाती है या आजीवन कारावास में बदल दी जाती है।
लिंग निर्धारण पर प्रतिबंध भारत में लिंग परीक्षण अवैध है ताकि लिंग-आधारित भेदभाव और कन्या भ्रूण हत्या को रोका जा सके।
[wp-faq-schema title="FAQs" accordion=1]
vikash

Recent Posts

जानें कौन हैं एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया, जिन्होंने संभाली ईस्टर्न एयर कमांड की कमान

एयर मार्शल इंदरपाल सिंह वालिया ( Air Marshal Inderpal Singh Walia ) को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी…

1 hour ago

16वें वित्त आयोग ने 41% हिस्सेदारी का बंटवारा क्यों बनाए रखा?

केंद्र और राज्यों के बीच धन के बंटवारे ने एक नए चरण में प्रवेश कर…

1 hour ago

16.5% हिस्सेदारी के साथ कौन-सा राज्य बना भारत का नवीकरणीय ऊर्जा पावरहाउस?

भारत की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में गुजरात ने बड़ी बढ़त हासिल की है। 31 दिसंबर…

1 hour ago

विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2026: प्रकृति के जीवनदायी पारिस्थितिक तंत्रों के संरक्षण का संकल्प

World Wetlands Day 2026: विश्व आर्द्रभूमि दिवस या विश्व वेटलैंड्स डे (World Wetlands Day) पूरे…

3 hours ago

रूमेटॉइड आर्थराइटिस जागरूकता दिवस 2026: गठिया के प्रति समझ और जागरूकता का संकल्प

रूमेटॉइड आर्थराइटिस को अक्सर केवल जोड़ों के दर्द के रूप में समझ लिया जाता है,…

4 hours ago

केंद्रीय बजट 2026-27 की मुख्य बातें

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने संसद में केंद्रीय बजट 2026–27…

4 hours ago