दुनिया भर में मनाया जा रहा अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पीड़ित दिवस 2025

विश्वभर में 21 अगस्त 2025 को आतंकवाद के पीड़ितों को श्रद्धांजलि और स्मरण का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है, जो अब अपने आठवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। यह गंभीर दिवस उन निर्दोष जीवनों को याद करने का अवसर देता है जो आतंकवादी घटनाओं में खो गए, साथ ही जीवित बचे लोगों की दृढ़ता को सम्मानित करने और शांति, न्याय तथा एकजुटता के प्रति हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता को पुनः दृढ़ करने का भी। इस वर्ष की थीम “आशा से एकजुट: आतंकवाद के पीड़ितों के लिए सामूहिक कार्य” यह रेखांकित करती है कि प्रभावित लोगों का सहारा बनने और ऐसा भविष्य बनाने में एकता की शक्ति कितनी महत्वपूर्ण है, जहाँ ऐसी हिंसा फिर कभी न दोहराई जाए।

इतिहास और उत्पत्ति

  • संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने वर्ष 2017 में इस अंतरराष्ट्रीय दिवस की स्थापना की।

  • उद्देश्य था: पीड़ितों और उनके परिवारों पर आतंकवाद के दीर्घकालिक प्रभाव को संबोधित करना।

  • तब से 21 अगस्त को वैश्विक स्तर पर स्मरण, श्रद्धांजलि और पीड़ितों के अधिकारों व गरिमा को बढ़ावा देने हेतु मनाया जाता है।

  • यह पहल संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद और अन्य संस्थागत प्रयासों पर आधारित है, जो पीड़ितों की आवाज़ को सशक्त और उन्हें न्याय दिलाने पर केंद्रित हैं।

2025 की थीम: “आशा से एकजुट: आतंकवाद के पीड़ितों के लिए सामूहिक कार्य”

  • यह थीम एकजुटता, उपचार और सहयोग का शक्तिशाली संदेश देती है।

  • “आशा से एकजुट” का अर्थ है कि राष्ट्रों, समुदायों और व्यक्तिगत अनुभवों के स्तर पर साथ आकर पीड़ा को संकल्प और कार्रवाई में बदला जा सकता है।

  • इसमें हाल ही में गठित विक्टिम्स ऑफ टेररिज़्म एसोसिएशंस नेटवर्क (VoTAN) की भूमिका भी झलकती है, जो पीड़ित–आधारित संगठनों को जोड़कर साझा उपचार, वकालत और नीतिगत संवाद को बढ़ावा देता है।

इस दिवस का महत्व

आतंकवाद केवल प्रत्यक्ष पीड़ितों पर ही नहीं, बल्कि परिवारों, समुदायों और राष्ट्रों पर गहरी चोट छोड़ता है। यह दिन निम्न उद्देश्यों को पूरा करता है:

  • पीड़ितों का स्मरण: उन लोगों को श्रद्धांजलि जो अपनी जान गंवा बैठे और जो अब भी पीड़ा सह रहे हैं।

  • आवाज़ बुलंद करना: पीड़ितों की कहानियों, आवश्यकताओं और अधिकारों को सामने लाना।

  • न्याय और सहयोग की वकालत: मुआवज़ा, मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ और कानूनी सहायता सुनिश्चित करना।

  • वैश्विक एकता को सुदृढ़ करना: कट्टरपंथ रोकने और आतंकवाद का मुकाबला करने हेतु समावेशी और सामुदायिक रणनीतियों पर बल देना।

इस दिन का आयोजन

दुनियाभर में इसे विभिन्न कार्यक्रमों और श्रद्धांजलियों के माध्यम से मनाया जाता है:

  • सार्वजनिक समारोह और स्मारक कार्यक्रम

  • ग़ैर–सरकारी संगठनों और संयुक्त राष्ट्र द्वारा आयोजित चर्चाएँ और मंच

  • सोशल मीडिया अभियानों में पीड़ितों और बचे हुए लोगों की गवाही साझा करना

  • शैक्षिक कार्यक्रम – विद्यालयों और समुदायों में सहिष्णुता, शांति और स्मरण पर पहल

  • नीतिगत संवाद – पीड़ितों को प्रभावी समर्थन देने के लिए आवश्यक सामाजिक व कानूनी ढाँचे पर चर्चा

यह दिवस हमें यह याद दिलाता है कि आतंकवाद के पीड़ितों का सम्मान और सहयोग करना केवल संवेदना का विषय नहीं, बल्कि न्याय, मानवाधिकार और एक सुरक्षित भविष्य की दिशा में सामूहिक जिम्मेदारी है।

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vikash

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