नस्लीय भेदभाव उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस: 21 मार्च

वर्ष 2025 अंतर्राष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव के सभी रूपों के उन्मूलन पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा अपनाई गई अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय (ICERD) की 60वीं वर्षगांठ का प्रतीक है। यह संधि 21 दिसंबर 1965 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित की गई थी। हर साल 21 मार्च को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन दिवस नस्लीय असमानता के विरुद्ध हुई प्रगति और शेष चुनौतियों को उजागर करता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
इस दिवस का पालन 21 मार्च 1960 को दक्षिण अफ्रीका में हुए शार्पविल नरसंहार की याद में किया जाता है, जब रंगभेदी “पास कानूनों” के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे 69 लोगों की पुलिस फायरिंग में मौत हो गई थी। इस घटना ने नस्लीय अन्याय के खिलाफ वैश्विक आंदोलन को मजबूती दी और रंगभेद (Apartheid) के अंत का मार्ग प्रशस्त किया।

ICERD की स्थापना और प्रभाव
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 21 दिसंबर 1965 को संकल्प 2106 (XX) के तहत अंतर्राष्ट्रीय नस्लीय भेदभाव उन्मूलन अभिसमय (ICERD) को अपनाया। यह मानवाधिकारों पर केंद्रित पहला अंतर्राष्ट्रीय समझौता था और इसे लगभग सभी सदस्य देशों ने स्वीकार किया है।

60 वर्षों में हुई प्रगति

नस्लीय भेदभाव वाले कानूनों का उन्मूलन

  • 1990 के दशक में दक्षिण अफ्रीका में रंगभेदी शासन समाप्त हुआ और लोकतंत्र स्थापित हुआ।
  • कई देशों ने नस्लीय भेदभाव संबंधी कानूनों को निरस्त किया।

वैश्विक कानूनी ढांचे की मजबूती

  • डरबन घोषणा (2001) और अन्य संयुक्त राष्ट्र सम्मेलनों ने नस्लीय समानता को बढ़ावा दिया।
  • ICERD के तहत सदस्य देशों को नस्लीय भेदभाव को अपराध की श्रेणी में रखने का निर्देश दिया गया।

नस्लवाद और ज़ेनोफोबिया (विदेशियों के प्रति भेदभाव) का सामना

  • 2009 में डरबन समीक्षा सम्मेलन में नस्लीय न्याय के लिए प्रतिबद्धता दोहराई गई।
  • 2015-2024 को अफ्रीकी मूल के लोगों का अंतर्राष्ट्रीय दशक घोषित किया गया।

वर्तमान चुनौतियां
सिस्टमगत नस्लवाद – शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार और न्याय व्यवस्था में भेदभाव जारी।
हेट स्पीच और नस्लीय हिंसा – कई देशों में नस्लीय हमलों और घृणास्पद भाषणों में वृद्धि।
आप्रवासन संकट – शरणार्थियों और प्रवासियों के साथ नस्लीय भेदभाव।
ICERD के कार्यान्वयन में कमी – कई क्षेत्रों में नस्लीय समानता संबंधी कानूनों का पालन ठीक से नहीं हो रहा।

संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबद्धता
संयुक्त राष्ट्र महासभा इस सिद्धांत को बनाए रखती है कि सभी मानव समान गरिमा और अधिकारों के साथ जन्म लेते हैं।

  • नस्लीय श्रेष्ठता का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।
  • सरकारों को सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों में भेदभाव रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
  • ऐतिहासिक अन्यायों को सुधारने के लिए विशेष नीतियों और मुआवज़ों की आवश्यकता है।

महत्वपूर्ण संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन और कार्यक्रम

डरबन घोषणा और कार्ययोजना (2001) – नस्लवाद के खिलाफ कानूनी और सामाजिक तंत्र मजबूत करने की अपील।
डरबन समीक्षा सम्मेलन (2009) – वैश्विक नस्लीय न्याय नीतियों की समीक्षा।
डरबन घोषणा की 10वीं वर्षगांठ (2011) – न्यूयॉर्क में उच्चस्तरीय बैठक कर नस्लीय न्याय पर पुनः बल।
अंतर्राष्ट्रीय दशक (2015-2024) – अफ्रीकी मूल के लोगों के अधिकारों, न्याय और विकास को बढ़ावा देने हेतु समर्पित।

निष्कर्ष
2025 में ICERD की 60वीं वर्षगांठ नस्लीय समानता की दिशा में वैश्विक प्रयासों की समीक्षा करने और भविष्य की रणनीतियों पर ध्यान केंद्रित करने का अवसर है। हालांकि प्रगति हुई है, लेकिन अभी भी नस्लीय भेदभाव और असमानता जैसी चुनौतियों से निपटने की आवश्यकता बनी हुई है।

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vikash

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