दुनिया भर में 16 जुलाई 1945 को पहले परमाणु हथियार परीक्षण के बाद से अब तक 2,000 से अधिक परीक्षण किए जा चुके हैं। इन परीक्षणों ने मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव डाले हैं। जैसे-जैसे परमाणु हथियार तकनीक और शक्तिशाली होती गई, परमाणु विकिरण और विनाशकारी परिणामों का खतरा और भी बढ़ गया। इन्हीं चिंताओं के मद्देनज़र संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2009 में 29 अगस्त को “परमाणु परीक्षणों के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय दिवस” घोषित किया, ताकि इस खतरे के प्रति वैश्विक जागरूकता बढ़ाई जा सके और परमाणु हथियार-मुक्त दुनिया की दिशा में प्रयास किए जा सकें।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2 दिसंबर 2009 को अपनी 64वीं बैठक में प्रस्ताव 64/35 को सर्वसम्मति से पारित कर 29 अगस्त को परमाणु परीक्षणों के विरुद्ध अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित किया।
यह तिथि कज़ाख़स्तान के सेमिपालातिंस्क परमाणु परीक्षण स्थल के 29 अगस्त 1991 को बंद होने की स्मृति में चुनी गई।
परमाणु परीक्षणों के खतरों और परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाना।
दुनिया भर के लोगों को यह शिक्षित करना कि सभी परमाणु विस्फोटों का अंत होना अत्यंत आवश्यक है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों को प्रोत्साहित करना ताकि परमाणु हथियारों का पूर्ण उन्मूलन और वैश्विक निरस्त्रीकरण सुनिश्चित हो सके।
2010 से इस दिवस को विश्वभर में विभिन्न कार्यक्रमों और अभियानों के माध्यम से मनाया जा रहा है। इनमें शामिल हैं —
सम्मेलन और संगोष्ठियाँ
सार्वजनिक प्रदर्शनियाँ और व्याख्यान
शैक्षणिक और जन-जागरूकता अभियान
प्रतियोगिताएँ और प्रकाशन
मीडिया प्रसारण और जन-अधिकार पहलें
संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2014 में 26 सितंबर को भी “परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन हेतु अंतर्राष्ट्रीय दिवस” घोषित किया।
परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन के लिए वैश्विक प्रयासों को संगठित करना।
इस संदेश को सुदृढ़ करना कि पूर्ण उन्मूलन ही परमाणु हथियारों के प्रयोग या उनके खतरे से सुरक्षा की एकमात्र गारंटी है।
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