INS मालवन की डिलीवरी से भारतीय नौसेना की ताकत को और बढ़ावा मिलेगा। यह अगली पीढ़ी का एंटी-सबमरीन युद्धपोत है, जिसे 31 मार्च, 2026 को कोच्चि में सौंपा गया। इसे पूरी तरह से देश के भीतर ही बनाया गया है, जिसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल हुआ है; इस युद्धपोत को भारत की समुद्री तटरेखा को पानी के नीचे से होने वाले खतरों से बचाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। INS मालवन रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और समुद्री सीमाओं की सुरक्षा पर देश के बढ़ते फोकस को दर्शाता है।
यह ASW विशेष रूप से तटीय या उथले पानी के ऑपरेशन्स के लिए बनाया गया है, जहाँ बड़े युद्धपोत कम प्रभावी होते हैं।
ये क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील हैं, क्योंकि यहाँ दुश्मन की पनडुब्बियाँ मौजूद हैं जो छिपकर काम कर सकती हैं। इसके अलावा, इस क्षेत्र का तटीय ढाँचा और बंदरगाह भी असुरक्षित हैं, और पारंपरिक रूप से बड़े जहाजों को यहाँ परिचालन संबंधी सीमाओं का सामना करना पड़ता है।
बेहतर सोनार और निगरानी प्रणालियों से लैस यह ASW, भारत के तटों के निकट मौजूद पानी के नीचे के खतरों के विरुद्ध रक्षा की पहली पंक्ति के रूप में कार्य करता है।
INS मालवन, INS माहे के बाद दूसरा जहाज़ है; यह आठ जहाज़ों की एक नियोजित श्रृंखला का हिस्सा है।
इस श्रृंखला में आने वाले जहाज़ हैं:
यह बेड़ा भारत के तटीय रक्षा नेटवर्क और समुद्री प्रभुत्व को काफी मज़बूत करेगा।
एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW) उन सैन्य रणनीतियों और तकनीकों को कहते हैं जिनका इस्तेमाल दुश्मन की पनडुब्बियों को:
ASW में सोनार सिस्टम, टॉरपीडो और विमानों व जहाजों से निगरानी करने का इस्तेमाल शामिल होता है।
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